🔥 हरिद्वार, कनखल।वैशाख शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी की 1238वीं जयंती महोत्सव बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ कनखल स्थित श्रीकृष्ण निवास आश्रम में मनाया गया।

कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने अद्वैत वेदांत के महान प्रवर्तक को नमन किया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8 बजे शंकराचार्य चौक पर विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक के साथ हुआ। इसके पश्चात हरकी पौड़ी पर जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी एवं उनके चारों शिष्यों का पूजन-अभिषेक जूना अखाड़ा के महामंत्री श्रीमहंत केरादपुरी जी महाराज द्वारा संपन्न कराया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लियाश्रद्धांजलि

सभा में उमड़े संत, गूंजा अद्वैत का संदेशप्रातः 10 बजे आयोजित श्रद्धांजलि सभा में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि “आदि शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म को एक सूत्र में पिरोकर अद्वैत का जो दिव्य संदेश दिया, वह आज भी मानवता को दिशा दिखा रहा है।

ब्रह्म ही सत्य है, यही उनके दर्शन का सार है।”वहीं परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि “आज के समय में शंकराचार्य जी के सिद्धांतों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

उनके विचार समाज को एकता और आध्यात्मिक जागरण की ओर प्रेरित करते हैं।”कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी गिरधर गिरि जी महाराज ने कहा कि “आदि शंकराचार्य जी केवल एक संत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के महान नायक थे।

उनका जीवन हमें धर्म, ज्ञान और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने किया प्रसाद ग्रहण श्रद्धांजलि सभा के उपरांत दोपहर 12 बजे विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया इस

अवसर पर संयोजक जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य स्मारक समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यगण सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।अद्वैत का अमर संदेश”ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः” — इस दिव्य सूत्र के साथ आयोजित यह महोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त संदेश भी बनकर उभरा।



