हरिद्वार। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर चण्डीगढ़ भवन, हरिद्वार में स्वर्गीय श्री लाला ओमचंद जी गर्ग (सैदेवाला) की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और ज्ञान की अविरल गंगा में स्नान किया। कथा व्यास परमपूज्य स्वामी श्री सोहम मुनि जी महाराज ने व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और वैराग्य का संदेश दिया।
स्वामी श्री सोहम मुनि जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को मोक्ष के मार्ग पर ले जाने वाला दिव्य शास्त्र है। उन्होंने भगवान के विभिन्न अवतारों की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए अवतरित होते हैं।
कथा के दौरान कपिल मुनि द्वारा माता देवहूति को दिए गए सांख्य योग और आत्मज्ञान का विस्तृत वर्णन किया गया। महाराज श्री ने बताया कि मनुष्य यदि अपने जीवन में भक्ति और सत्संग को अपनाए तो वह संसार के बंधनों से मुक्त होकर परम शांति प्राप्त कर सकता है।
दूसरे दिन की कथा में ध्रुव चरित्र का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प, अटूट श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण से एक बालक भी ध्रुव की भांति अमर पद प्राप्त कर सकता है। ध्रुव की तपस्या और भगवान विष्णु के दर्शन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
स्वामी जी ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण मानव जीवन को पवित्र बनाता है तथा व्यक्ति के भीतर सद्गुणों का विकास करता है। कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा तथा श्रद्धालु भगवान के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे।
कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि कथा का आयोजन 3 जून तक प्रतिदिन सायंकाल किया जा रहा है। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
श्रीमद्भागवत कथा में कपिल ज्ञान, ध्रुव भक्ति और भगवान के अवतारों का दिव्य वर्णन




