हरिद्वार। कमल शर्मा/श्री यंत्र मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पीठ पर विराजमान आचार्य पंडित नीरज जोशी ने भक्तों को श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय दिवस के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन सुनाते हुए कहा कि भगवान की कथा मनुष्य जीवन को मोक्ष की ओर ले जाने वाली दिव्य धारा है।

उन्होंने ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद और भगवान की भक्ति के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि जब मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ प्रभु का स्मरण करता है तो उसके जीवन के समस्त कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। कथा के दौरान पूरा वातावरण “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से भक्तिमय हो उठा।

इस अवसर पर स्वामी सुमनानंद ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को संस्कार, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला महायज्ञ है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने के लिए ऐसी कथाओं का आयोजन अत्यंत आवश्यक है।

स्वामी रवि देव शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कथा हमें प्रेम, करुणा और सेवा का संदेश देती है तथा समाज में आपसी भाईचारे को मजबूत करती है।
वहीं स्वामी कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे बड़ा साधन है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से सत्संग और धार्मिक आयोजनों में भाग लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य यजमान प्रकाश जोशी ने कहा कि कथा आयोजन का उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना जागृत करना और लोगों को अध्यात्म से जोड़ना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कथा के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह आयोजन को सफल बना रहे हैं।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भजन-कीर्तन के साथ भक्तिरस में सराबोर होकर भगवान का गुणगान किया। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई।



