हरिद्वार। कमल शर्मा/ सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण के साथ-साथ बेहतर सुविधाएं और सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं देखने को मिल रही हैं। नील पर्वत की शिवालिक पहाड़ियों पर स्थित मां चंडी देवी का यह प्राचीन मंदिर देशभर से आने वाले भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि मां चंडी देवी के दरबार में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आता है, माता उसकी हर इच्छा पूर्ण करती हैं।
इतिहास और आस्था से जुड़े इस पवित्र धाम का निर्माण वर्ष 1929 में कश्मीर के राजा सुचात सिंह द्वारा कराया गया था, जबकि मंदिर में स्थापित मां चंडी देवी की मुख्य प्रतिमा आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा 8वीं शताब्दी में स्थापित की गई थी। पंच तीर्थों में शामिल यह मंदिर हरिद्वार की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
पिछले एक वर्ष से युवा महंत महंत भवानी नंदन गिरी के नेतृत्व में मंदिर की व्यवस्थाओं में लगातार सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। उनकी युवा सोच, प्रोफेशनल कार्यशैली और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के समन्वय से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को बेहतर माहौल और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए भोजन प्रसाद की निःशुल्क व्यवस्था लगातार संचालित की जा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां की स्वच्छता, अनुशासन और सेवा भाव उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करता है। महंत भवानी नंदन गिरी दिन-रात मंदिर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
बताया जा रहा है कि पिछले चार-पांच महीनों से बीकेडी के सहयोग से मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। महंत भवानी नंदन गिरी की सौम्यता और सेवा भावना भक्तों के मन को छू जाती है। मां चंडी देवी के दर्शन कर श्रद्धालु जयकारों और माता के गुणगान के साथ प्रसन्न मन से वापस लौट रहे हैं।
मां चंडी देवी धाम में युवा महंत भवानी नंदन गिरी के नेतृत्व में श्रद्धालुओं को मिल रही उत्कृष्ट व्यवस्थाएं



