“भागवत कथा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य सेतु है”: कथा व्यास पं. ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य


“श्रीमद्भागवत श्रवण से जीवन में धर्म, ज्ञान और भक्ति का संचार होता है” कैलाश चंद्र गुप्ता

(कमल शर्मा)गीता कुटीर तपोवन, हरिपुरकला में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच कथा व्यास पं. ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य ने भगवान की विभिन्न दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कथा व्यास पं. ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य ने कहा कि भागवत कथा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य सेतु है। जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ भागवत श्रवण करता है, उसके जीवन के अज्ञान और दुःख दूर होकर आध्यात्मिक प्रकाश का उदय होता है। उन्होंने कहा कि भगवान समय-समय पर अपने भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न अवतार धारण करते हैं।


तीसरे दिन की कथा में मुख्य रूप से भगवान वराह अवतार, कपिल मुनि द्वारा प्रदत्त सांख्य योग, वामन अवतार, सृष्टि के विस्तार, स्वायंभुव मनु तथा भक्त ध्रुव के प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के दौरान भगवान वराह द्वारा पृथ्वी उद्धार, कपिल मुनि के ज्ञान एवं वैराग्य के उपदेश तथा राजा बलि और वामन भगवान के अद्भुत संवाद का वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।


इस अवसर पर यजमान कैलाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का महायज्ञ है। भागवत श्रवण से मनुष्य के जीवन में धर्म, ज्ञान और भक्ति का संचार होता है तथा जीवन को सही दिशा मिलती है।
कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान के जयकारों के साथ धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति एवं गीता कुटीर परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं।
श्रीमद्भागवत सप्ताह का आयोजन 08 जून से 14 जून 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से सायं 5:30 बजे तक गीता कुटीर तपोवन, हरिपुरकला में किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर कथा अमृत का रसपान कर रहे हैं।

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