हरिद्वार (कमल शर्मा)। भूपतवाला स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन परम पूज्य श्री रविनंदन शास्त्री जी महाराज ने समुद्र मंथन, भगवान के विभिन्न दिव्य अवतारों तथा ध्रुव चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे पंडाल में भक्ति एवं श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

कथाव्यास श्री रविनंदन शास्त्री जी महाराज ने कहा कि समुद्र मंथन केवल पौराणिक घटना नहीं, बल्कि मानव जीवन का प्रतीक है। जीवन में धैर्य, परिश्रम और संयम के मंथन से ही अमृत रूपी सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि भगवान ने समय-समय पर नृसिंह सहित विभिन्न अवतार धारण कर धर्म की रक्षा, भक्तों के कल्याण और अधर्म के विनाश का संदेश दिया।

ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि बालक ध्रुव ने अपमान और कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि अटूट श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और भगवान के प्रति अखंड भक्ति के बल पर अमर पद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि जिसके मन में अटल विश्वास, सच्ची भक्ति और लक्ष्य के प्रति समर्पण होता है, उसे संसार की कोई शक्ति सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकती।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में ईर्ष्या, अहंकार और द्वेष का त्याग कर सत्य, सेवा, सदाचार और भगवान की भक्ति को अपनाएं। यही श्रीमद्भागवत का वास्तविक संदेश है और यही मानव जीवन को सफल एवं सार्थक बनाता है।

कथा के दौरान श्रद्धालु भजनों और जयघोष में भावविभोर होकर भगवान की भक्ति में लीन रहे। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। आयोजन को सफल बनाने में रविंदर गर्ग एवं आर.के. गर्ग सहित सभी श्रद्धालुओं का सराहनीय सहयोग रहाi
इस अवसर पर रविंदर गर्ग शशि मंजू अमित परवीन राकेश
रिम्पी अरविंद रजनी नवनीत आदि उपस्थित रहे l









