श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर गूंजी हरि नाम की अमृत धारा, कथा व्यास ने बताया भक्ति का महत्व


हरिद्वार(कमल शर्मा) पावन धार्मिक वातावरण के बीच शुक्रवार, 19 जून से श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ श्रद्धा एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। कथा के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान श्रीहरि की महिमा का श्रवण किया और भक्ति रस में डूब गए।
इस धार्मिक आयोजन के यजमान श्री इंदर लाल माथुर, निवासी जोधपुर (राजस्थान) हैं, जिनके सौजन्य से यह पुण्य आयोजन 19 जून से 25 जून तक आयोजित किया जा रहा है। प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से 10:00 बजे तक विधिवत पूजन-अर्चन एवं दोपहर 3:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।
कथा व्यास संत तारा देवी ने प्रथम दिवस की कथा में श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि “श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ज्ञान है। कथा श्रवण से मन को शांति, जीवन को दिशा और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का अवसर प्राप्त होता है।”
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजनों की आवश्यकता और भी बढ़ गई है, क्योंकि यही संस्कार और सनातन संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का माध्यम हैं।
प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और कथा श्रवण के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का लाभ उठाने का आह्वान किया।

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