हरिद्वार (कमल शर्मा)। किसान-मजदूर महाकुंभ के दूसरे दिन हरिद्वार में देश के विभिन्न राज्यों से आए किसानों, मजदूरों और किसान नेताओं का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। चार दिवसीय महाकुंभ (15 से 18 जून 2026) के दौरान किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के समक्ष किसानों की समस्याओं को मजबूती से उठाने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर राकेश टिकैत ने कहा कि देश का किसान आज भी अपनी फसलों का लाभकारी मूल्य, बढ़ती लागत, सिंचाई, बिजली और कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। किसानों और मजदूरों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। किसानों की आवाज़ को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाने के लिए संगठन लगातार प्रयास करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और सरकार को किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने, युवाओं को खेती से जोड़ने तथा किसान-मजदूर वर्ग की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस नीतियों की आवश्यकता है।

महाकुंभ के दूसरे दिन आयोजित विचार गोष्ठियों में कृषि सुधार, एमएसपी की गारंटी, किसानों की आय बढ़ाने, मजदूरों के अधिकारों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। देशभर से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और सुझावों को मंच पर रखा।

कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने एक स्वर में कहा कि किसान-मजदूरों की एकजुटता ही उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाएगी। महाकुंभ स्थल पर पूरे दिन किसानों की भारी भीड़ रही और विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर युवा ब्लॉक अध्यक्ष प्रधान नईम ने महाकुंभ में पधारे सभी किसान-मजदूर भाइयों, संगठन पदाधिकारियों एवं अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि हरिद्वार की पावन धरती पर आयोजित यह महाकुंभ किसान एकता और संघर्ष का बड़ा मंच साबित होगा। उन्होंने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके सफल प्रवास की कामना की।
चार दिवसीय किसान-मजदूर महाकुंभ आगामी दिनों में भी विभिन्न सत्रों, चिंतन बैठकों और किसान हितों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों के साथ जारी रहेगा।




