किसानों की हुंकार: राष्ट्रीय किसान आयोग से कर्जमाफी तक, केंद्र सरकार को सौंपा 11 सूत्रीय मांग-पत्र

हरिद्वार(कमल शर्मा)चिंतन शिविर में देशभर के किसान नेताओं का मंथन, कृषि को लाभकारी बनाने की उठी जोरदार मांग
हरिद्वार। भारतीय किसान यूनियन चौधरी चरण सिंह के तत्वावधान में हरिद्वार में आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर (15, 16 एवं 17 जून 2026) में देशभर से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों, कृषि विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किसानों की ज्वलंत समस्याओं पर व्यापक चर्चा की। शिविर में सर्वसम्मति से किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 11 सूत्रीय मांग-पत्र तैयार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया।


राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी ने कहा कि देश का किसान लगातार बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं, फसलों के उचित मूल्य न मिलने और प्रशासनिक जटिलताओं से जूझ रहा है। यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो कृषि क्षेत्र गंभीर संकट का सामना करेगा।


उन्होंने मांग की कि किसानों की आय, लागत, फसल मूल्य और कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी के लिए संवैधानिक अधिकारों से युक्त राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया जाए। आलू किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने, सरकारी खरीद व्यवस्था लागू करने तथा कोल्ड स्टोरेज शुल्क में सहायता प्रदान करने की भी मांग उठाई गई।


शिविर में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को समयबद्ध करने, विलंब होने पर ब्याज सहित भुगतान देने तथा चीनी मिलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की गई। इसके अलावा डीएपी और यूरिया खाद की कमी दूर करने, जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर कठोर कार्रवाई तथा खाद की पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।


किसान नेताओं ने फार्मर आईडी प्रक्रिया को सरल बनाने, ग्राम स्तर पर विशेष शिविर लगाकर निःशुल्क पंजीकरण कराने तथा छोटे और अशिक्षित किसानों के लिए सहज व्यवस्था विकसित करने की मांग भी रखी। किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, कृषि ऋणों पर ब्याज दर कम करने तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को विशेष राहत देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।


मांग-पत्र में ब्रज क्षेत्र के हाथरस जनपद में चौधरी चरण सिंह केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना, गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों की खरीद सामान्य एमएसपी से दोगुने मूल्य पर करने की मांग भी शामिल है।


इसके अतिरिक्त किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, नहरों और नलकूपों का विकास तथा जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई।


राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। इस अवसर पर बोलते हुए मंत्र देशराज कर्डवाल ने कहा कि किसानों को सम्मानजनक जीवन, उचित मूल्य और सरल प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध कराकर ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार किया जा सकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।
“जय जवान, जय किसान” के उद्घोष के साथ शिविर में उपस्थित किसान प्रतिनिधियों ने किसानों के अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

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