हरिद्वार (कमल शर्मा)। सप्तऋषि रोड स्थित श्री गीता कुटीर तपोवन में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह का समापन रविवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समापन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का इतना सुंदर एवं सजीव चित्रण प्रस्तुत किया गया कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। संपूर्ण परिसर जय श्रीकृष्ण के उद्घोष, भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।

कथा व्यास पंडित श्री ब्रह्मरात हरितोष एकलव्य जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के दिव्य प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, धर्म, करुणा और लोककल्याण का अनुपम संदेश देता है। उन्होंने रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची भक्ति और समर्पण से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है। कथा के अंतिम दिवस श्रद्धालु कथा श्रवण कर भक्ति रस में सराबोर हो गए।

इस अवसर पर मुख्य यजमान कैलाश चंद्र गुप्ता ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज भी मानवता को सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। रुक्मिणी विवाह का प्रसंग प्रेम, विश्वास और ईश्वर के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत संदेश देता है।

समापन समारोह में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के दिव्य स्वरूप का स्वागत किया तथा भजन-कीर्तन के साथ उत्सव का आनंद लिया। कथा के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

समारोह में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में सभी ने विश्व कल्याण, धर्म रक्षा एवं मानवता के मंगल की कामना करते हुए कथा व्यास का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री गीता कुटीर तपोवन का संपूर्ण वातावरण भक्तिरस, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।




