श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह और महारास की अमृतवर्षा में डूबे श्रद्धालु, संतों ने बताया भक्ति ही जीवन का सच्चा आधार

हरिद्वार (कमल शर्मा), 7 जून 2026। कनखल स्थित संन्यास रोड पर हरि भारती विद्यालय में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, महारास (रास पंचाध्यायी) तथा मथुरा गमन के प्रसंग सुनाए। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और पूरा पंडाल “राधे-राधे” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।
कथा व्यास ने कहा कि रुक्मिणी विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। वहीं महारास का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण प्रत्येक भक्त के हृदय में विराजमान हैं और सच्ची भक्ति से ही उनकी प्राप्ति संभव है। मथुरा गमन के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
इस अवसर पर ગૌ ભક્ત પુ. શ્રી ધનેશ્વરભાઈ જોષી (જય માં મોમાઈ, મોમાઈ મોરા ધામ મોરાગઠ) ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को धर्म, संस्कार और सेवा का मार्ग दिखाती है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, त्याग और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है।
कार्यक्रम में उपस्थित महंत 1008 कुर्शीपुरी बापू ने कहा कि महारास का वास्तविक संदेश आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव है। आज के भौतिकवादी युग में भागवत कथा मानवता को आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का आह्वान किया।
वहीं श्री महंत शुभमगिरि बापू ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल धार्मिक प्रसंग नहीं बल्कि जीवन प्रबंधन की सर्वोत्तम शिक्षा हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति, सेवा और सदाचार को अपनाकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है।
कथा के दौरान यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण और मानव मंगल की कामना की। भजन-कीर्तन और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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