जूना अखाड़े की ऐतिहासिक पहल: वाल्मीकि अखाड़े का गठन, कृष्णा शाह नंद गिरी बने जगतगुरु



हरिद्वार (कमल शर्मा)। सनातन परंपरा में सामाजिक समरसता और सभी वर्गों की सहभागिता को नया आयाम देते हुए श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े ने ऐतिहासिक निर्णय लिया। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने वाल्मीकि अखाड़े के गठन की घोषणा करते हुए दिल्ली स्थित वाल्मीकि धाम के पीठाधीश्वर कृष्णा शाह नंद गिरी महाराज को जगतगुरु की उपाधि प्रदान की।
इससे पूर्व कनखल स्थित हरिहर आश्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने अखाड़े की प्राचीन परंपरा के अनुरूप कृष्णा शाह नंद गिरी महाराज का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक कर उन्हें जगतगुरु बनाए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जगतगुरु कृष्णा शाह नंद गिरी महाराज सनातन धर्म के उत्थान, संरक्षण और समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करेंगे।


इसके पश्चात माया देवी मंदिर में आयोजित भव्य समारोह में अधिष्ठात्री देवी मां माया की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद अखाड़े के वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज तथा आह्वान अखाड़े की श्रीमहंत विभा गिरी महाराज ने चादर विधि संपन्न कर कृष्णा शाह नंद गिरी महाराज का समस्त साधु समाज एवं जूना अखाड़े की ओर से जगतगुरु पद पर विधिवत अभिषेक किया।


इस अवसर पर श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि जूना अखाड़ा सदैव समाज के प्रत्येक वर्ग का सम्मान करता आया है। वाल्मीकि अखाड़े का गठन सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने और सभी वर्गों को सनातन धर्म की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी कुंभ पर्व में वाल्मीकि अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ शाही स्नान में भाग लेगा तथा अन्य महामंडलेश्वरों की भांति उसे भी रथ, छत्र और सिंहासन की सम्मानित व्यवस्था प्रदान की जाएगी।


अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने जूना अखाड़े की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय समाज में भाईचारे, समानता और सामाजिक सौहार्द का सशक्त संदेश देगा तथा सभी वर्ग मिलकर विश्वभर में सनातन धर्म की पताका को और अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत महेश पुरी, श्रीमहंत पूर्णागिरि, श्रीमहंत गिरीशानंद गिरि, महंत आनंदेश्वर गिरी, महंत नीलकंठ गिरी, महंत आदित्य गिरी, महंत भीष्म गिरी, महंत मुन्ना गिरी, श्रीमहंत देवानंद सरस्वती, भीमनाथ, चेतन नंद, विष्णु दास, साहिल नाथ, सुशांत गोल्डी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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