हरिद्वार(कमल शर्मा)संन्यास मार्ग, कनखल स्थित श्री पूर्णानन्द आश्रम में रणछोड़ मित्र मंडल, अहमदाबाद के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो रहे हैं। कथा के चौथे दिन कथा व्यास परम पूज्य हितेश भाई शास्त्री ने भगवान के वामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी कथा का वर्णन किया।

कथा व्यास ने बताया कि जब दैत्यराज बलि के प्रभाव से तीनों लोकों में असंतुलन उत्पन्न हो गया और देवता संकट में पड़ गए, तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर धर्म की पुनर्स्थापना की। बाल ब्राह्मण के रूप में भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा। राजा बलि के वचन देते ही भगवान ने विराट स्वरूप धारण कर एक पग में पृथ्वी, दूसरे पग में स्वर्ग लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपना शीश भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि यह प्रसंग त्याग, विनम्रता और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है।

इसके उपरांत श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का मनोहारी वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ गया और कंस के अत्याचारों से जनमानस त्रस्त हो गया, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। मध्यरात्रि में कारागार में भगवान के प्राकट्य का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भगवान के जन्म के साथ ही पूरे पांडाल में जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने भजनों और नृत्य के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उत्साहपूर्वक उत्सव मनाया। नंदोत्सव की झलक ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल अधर्म के विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानवता को प्रेम, करुणा, धर्म और भक्ति का मार्ग दिखाने के लिए हुआ था। जो व्यक्ति भगवान की शरण में जाता है, उसके जीवन के समस्त संकट दूर हो जाते हैं।

इस अवसर पर आयोजक हसमुख भाई ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरण और संस्कारों के संवर्धन का माध्यम है। उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं का श्रवण करने का सौभाग्य मिल रहा है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से कथा श्रवण कर धर्म लाभ लेने का आह्वान किया।

कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान की दिव्य लीलाओं का रसपान किया तथा भक्ति और श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण किया। पूरे आश्रम परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।




