गीता ज्ञान की गंगा में डूबे श्रद्धालु, गीता मनीषी बोले— गीता पाठ से मिलता है मोक्ष का मार्ग
हरिद्वार(कमल शर्मा)पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित गीता ज्ञान–गीता ध्यान एवं श्रीमद्भगवद् अनुष्ठान के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्री शम्मी बंसल एवं श्रीमती निधि बंसल ने विधिवत श्रीमद्भगवद्गीता पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में मां गंगा के पावन तट पर गीता ज्ञान की गंगा का प्रवाहित होना प्रभु की विशेष कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन सात दिनों तक गीता ज्ञान, गीता ध्यान तथा श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का निरंतर पाठ किया जा रहा है, जिसका आध्यात्मिक लाभ अनंत और कल्याणकारी है।

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिव्य कला है। गीता का नियमित पाठ मनुष्य को आत्मिक शांति प्रदान करता है तथा उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से मन, वचन और कर्म से गीता का अध्ययन एवं पाठ करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, राज्य मंत्री ओमप्रकाश, अशोक चावला, दयानंद बेनीवाल, किशोर अग्रवाल, संदीप अग्रवाल (बेंगलुरु), डॉ. अशोक सम्राट, सतीश अग्रवाल, राजेश चावला, पवन कुमार, अजय मलिक, अजय कुमार, मुकेश रवि, नवीन कुमार, मन्नू राणा, खैराती लाल मक्कर, चिरंजीव खट्टर, कुंज बिहारी, जगदीश छाबड़ा, सुनील सेठी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन डॉ. विवेक कोहली तथा राज कुमार विज द्वारा किया गया। गीता ज्ञान की अमृतवर्षा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर धर्मलाभ प्राप्त करते रहे।




