हरिद्वार, 17 मई 2026। जनपद हरिद्वार के थाना श्यामपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गैंडीखाता निवासी भूपेन्द्र सिंह असवाल ने अपनी जमीन को कब्जा मुक्त कराने तथा परिवार की सुरक्षा की मांग को लेकर श्यामपुर थानाध्यक्ष को प्रार्थना पत्र सौंपा है। पीड़ित का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे वह और उनका परिवार भय एवं तनाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

भूपेन्द्र सिंह असवाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2004 में स्वर्गीय रामरती रामरतन एवं उनके पुत्र पाल सिंह, राजेन्द्र सिंह और सुखी सिंह से उक्त भूमि खरीदी थी। उन्होंने बताया कि पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने अपने पुत्र के पालन-पोषण के लिए दूसरी शादी की थी, जिससे उनकी दो पुत्रियां हैं। एक पुत्री का विवाह देहरादून में हो चुका है जबकि दूसरी को उन्होंने पढ़ाया-लिखाया है।

पीड़ित का आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले हरजिंदर सिंह ने उनकी दूसरी पत्नी को बहला-फुसलाकर उनकी जमीन हड़पने की साजिश रची। विरोध करने पर कई बार उनके साथ मारपीट की गई तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि हरजिंदर सिंह महिलाओं को इकट्ठा कर उनके साथ अभद्रता और मारपीट करता है, जिसके चलते कई बार उन्हें, उनके पुत्र और पुत्रवधू को जान बचाकर घर छोड़कर भागना पड़ा।

भूपेन्द्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उनके घर की दीवारें तोड़कर जमीन पर ट्रैक्टर एवं पत्थरों का चट्टा लगा दिया है। साथ ही उनकी पत्नी को वर्ष 2020 से गैंडीखाता में ही अलग कमरा दिलाकर उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी ने उनकी पत्नी का नाम भी बदल दिया है तथा जमीन से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला तो वह, उनका पुत्र और पुत्रवधू आत्महत्या करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्तियों की होगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भूपेन्द्र सिंह असवाल ने मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनकी जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाए तथा उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।



