🔥 हरिद्वार/कमल शर्मा/पावन नगरी हरिद्वार में आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब उल्हासनगर स्थित धन गुरु नानक थायरासिंग दरबार में तीन दिवसीय भव्य कल्याणकारी सत्संग कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर दरबार की तीसरी धर्मशाला का भव्य उद्घाटन भी किया गया, जिससे श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधाओं में उल्लेखनीय विस्तार हुआ।
सत्संग कार्यक्रम में उल्हासनगर सहित देशभर से 10,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और गुरुजनों के श्रीमुख से निकले पावन वचनों का श्रवण कर अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति और श्रद्धा का वातावरण चरम पर रहा।
नई धर्मशाला का निर्माण भाईसाहेब जसकीरत सिंह एवं भाईसाहेब तिलोचन सिंह के सान्निध्य में कराया गया है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं से युक्त 36 कमरों की व्यवस्था की गई है। इससे पूर्व दरबार में वर्ष 2013 में पहली धर्मशाला (44 कमरे) और वर्ष 2021 में दूसरी धर्मशाला (32 कमरे) का शुभारंभ हो चुका है। तीसरी धर्मशाला के जुड़ने से अब श्रद्धालुओं के लिए आवास क्षमता में बड़ी वृद्धि हुई है।
उद्घाटन समारोह में भाई चिमणजीत सिंह लाल (दिल्ली), साईं मोहनलाल (लखनऊ), साईं छोटूराम, संत बाबा सरब प्रीत सिंह नामधारी, साईं जगदीश जी (अमरधाम अहमदाबाद), परमजीत सिंह आनंद टोनी (दिल्ली) सहित अनेक संत-महात्मा एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने भाग लिया, जिनमें जसप्रीत सिंह, त्रिलोचन सिंह, चरणजीत सिंह, साईं मोहनलाल, राजेश भाटिया, राजेंद्र चंदवानी, घनश्याम पावली, अनीता मुंजवानी, गौरव मनसुखानी सहित अनेक भक्तजन शामिल रहे।
इस अवसर पर संत बाबा सरबप्रीत महाराज ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि “जिस व्यक्ति की ईश्वर में अटूट आस्था होती है और जो गुरु की शरण में आ जाता है, उसका जीवन स्वतः ही धन्य और कृतार्थ हो जाता है।”
पूरे आयोजन के दौरान हरिद्वार की पावन भूमि भक्तिरस में सराबोर रही और श्रद्धालुओं ने गुरु वचनों के माध्यम से अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों की ओर अग्रसर करने का संकल्प लिया
ब्यूरो चीफ़–स्वानंद



