2025 से लागू नई श्रम संहिताएं मजदूरों के जीवन को 100 से 150 साल पीछे ले जाने वाले हैं=जय प्रकाश

कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
हरिद्वार,मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा)
घटक- इंकलाबी मजदूर केंद्र (IMK)और मजदूर संघर्ष संगठन(MSS) द्वारा अखिल भारतीय मजदूर अधिकार दिवस के रूप में देश के अधिकतर राज्यों में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा चार मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं के लागू करने का विरोध के रूप में प्रदर्शन व रैलियों का आयोजन किया गया। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का रुद्रपुर में और गढ़वाल मंडल का
हरिद्वार के चिन्मय डीग्री कालेज,निकट शिवालिक नगर चौक पर
समय- 12.30 से
एक महासभा और‌‌ बाद में रावली महदूद मजदूर बस्ती में रैली निकालकर मजदूरों को जागरूक किया गया ।


कार्यक्रम की शुरुआत एक क्रांतिकारी गीत के साथ की गयी। इसके बाद इंकलाबी मजदूर केंद्र के जय प्रकाश ने 29 केन्द्रीय श्रम कानूनों को समाप्त कर चार मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को मोदी सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 से लागू कर दिये गये हैं। ये नई श्रम संहिताएं मजदूरों के जीवन को 100 से 150 साल पीछे ले जाने वाले हैं। महिलाओं से रात की पाली में काम कराने वाला कानून महिलाओं के साथ अपराध बढायेगा,यौन अपराध व महिला हिंसा में वृद्धि होगी।
300 से कम मजदूर होने पर छटनी और तालाबंदी की छूट पूंजीपतियों को दे दी गई है। ट्रेड यूनियन बनाना और हड़ताल करना चुनौतीपूर्ण बना दिया गया है।
मजदूर संघर्ष संगठन के कुलदीप ने कहा कि यह संगठित मजदूरों के साथ साथ असंगठित मजदूरों पर भी जबरजस्त हमला है।
कम्पनी एक्ट के तहत मजदूर और कारखाने की परिभाषा ही बदल दी गई है।नये लेबर कोड्स के तहत प्रशिक्षुओं (ट्रेनी )व एफटीई,नीम और नेप्स पर काम करने मजदूरों को मजदूरों की परिभाषा से बाहर कर दिया गया है उन्हें सीधे तौर पर श्रम कानूनों से बाहर कर दिया गया है। ये श्रम सुधार सीधे तौर पर कारपोरेट पूंजीपतियों को मालामाल व मजदूर वर्ग को कंगाल करने के लिए लाये गये हैं।इन काले कानूनों का देश व्यापी विरोध से ही तानाशाह सरकार को पीछे हटाया जा सकता है। मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा लेबर कोड्स को रद्द करने समेत 12 मांगे प्रमुखता से उठाई गयी है। जिसमें स्कीम वर्कर्स जैसे भोजन माता, आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को स्थायी करने व‌ प्रत्येक मजदूर को न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपए घोषित हो, ठेका प्रथा को समाप्त करने व समान काम का समान वेतन देने,सार्वजनिक उपक्रमों/संस्थाओं के निजीकरण पर रोक लगाने, ग्रामीण मनरेगा मजदूरों को साल में कम से कम 300 दिन का काम व‌ 1000 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाये, प्रवासी मजदूरों के साथ कोई भेदभाव न हो,गिग व प्लेटफ़ार्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के साथ सभी श्रम कानूनों का लाभ दिया जाये।
इसके अलावा उत्तराखंड में इंजीनियरिंग उद्योगों में वेज वोर्ड गठित कर न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण किया जाए। उत्तराखंड सरकार द्वारा न्यूनतम वेतनमान में की गयी वृद्धि में उच्च न्यायालय द्वारा लगायी गयी 50 प्रतिशत की रोक को हटाया जाए व महंगाई भत्ता को लागू किया जाए।
विरोध प्रदर्शन में
शामिल संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के संयोजक गोविंद सिंह ,भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राजकिशोर,रोडवेज कर्मचारी यूनियन सहारनपुर के रविन्द्र
सीएचओ यूनियन सहारनपुर के कुलदीप, संयुक्त महिला मंच सहारनपुर की गुरुमीत,फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी के ‌देवेन्द ,देवभूमि श्रमिक संगठन एच यू एल‌‌ के‌ महामंत्री दिनेश कुमार
एवरेडी मजदूर यूनियन के महामंत्री अनिल कुमार,किर्बी श्रमिक कमेटी के प्रधान कृष्ण मुरारी सिमेंस वर्कर्स यूनियन(सी एंड एस)‌के अशोक गिरि कर्मचारी संघ सत्यम आटो के महिपाल एवरेस्ट इंडस्ट्रीज़ मजदूर यूनियन के कुलदीप,प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की रजनी , अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के उपाध्यक्ष शमशाद हुसैन,जन अधिकार संगठन के का.ओमपाल सिंह क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के नासिर अहमद,ए आई के एम एस एस से सुभाष,उपनल कर्मचारी महासंघ के कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट,
प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की नीता एवं किसान यूनियन एवं अन्य यूनियनों व संगठनों नेता ने भी महासभा में अपनी बातें रखीं। केंद्र की मोदी सरकार को मजदूरों, किसानों, छात्र -नौजवानों, महिलाओं, दलितों व अल्पसंख्यको के खिलाफ बताया। तथा मोदी सरकार को सीधे कारपोरेट- पूंजीपतियों के हितों को साधने वाला बताया।
महासभा और रैली में मजदूर संघर्ष संगठन के देहरादून, रुड़की और सहारनपुर से सदस्यों, कार्यकर्ताओं के अलावा स्वास्थ्य विभाग व परिवहन विभाग से जुड़ी यूनियनों ने भी भागीदारी की।
कार्यक्रम का संचालन इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी -पंकज कुमार एवं मजदूर संघर्ष संगठन के सुनील द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मोहन, रविन्द्र,महेश, लोकेन्द्र सिंह, सुभाष,शीला, आदि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *