हरिद्वार। सनातन संत परंपरा के लिए गौरवपूर्ण क्षण उस समय बना, जब निरंजनी अखाड़े में आयोजित भव्य पट्टाभिषेक समारोह में विद्वान संत स्वामी गोपालानंद भारती को विधिवत महामंडलेश्वर की पदवी से अलंकृत किया गया। तिलक, चादर विधि और पुष्पवर्षा के बीच हुए इस गरिमामय समारोह में सभी तेरह अखाड़ों के संत-महापुरुषों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

अखाड़े के पंच परमेश्वरों के सानिध्य में आयोजित समारोह की अध्यक्षता महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद भारती महाराज ने की, जबकि संचालन निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने किया।
महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद भारती महाराज ने कहा कि स्वामी गोपालानंद भारती एक विद्वान, तपस्वी और कर्मनिष्ठ संत हैं। उनके नेतृत्व में संत परंपरा, अखाड़ा मर्यादा और सनातन धर्म को नई ऊर्जा और दिशा मिलेगी

श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर का पद संत समाज में अत्यंत सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्हें विश्वास है कि स्वामी गोपालानंद भारती अपनी विद्वता, सेवा और समर्पण से अखाड़े की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

महामंडलेश्वर पद ग्रहण करने के बाद स्वामी गोपालानंद भारती ने सभी संत-महापुरुषों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का अवसर है। उन्होंने कहा कि वे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के नेतृत्व में सनातन धर्म के संरक्षण, संवर्धन तथा निरंजनी अखाड़े की उन्नति के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेंगे।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, स्वामी अनंतानंद, स्वामी रामानुज सरस्वती, स्वामी सहजानंद पुरी, स्वामी ज्योर्तिमयानंद सहित अनेक संतों ने नवनियुक्त महामंडलेश्वर को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।
समारोह में स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, महंत पूर्णानंद, स्वामी नागेंद्र महाराज, स्वामी आदित्य, स्वामी कृष्ण गिरी, स्वामी गंगा गिरी, स्वामी आत्मानंद सरस्वती सहित बड़ी संख्या में संत-महापुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।





