🔥अभिभावकों के आरोपों के बीच प्रधानाध्यापिका रीति चौहान और सीईओ अमित चंद ने दिया जवाब, जांच की मांग तेज
रोशनाबाद-हेतमपुर अन्नेकी क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में इन दिनों अव्यवस्थाओं और आरोपों का मामला गरमाता जा रहा है। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हुए बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था और दस्तावेजी गड़बड़ियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में बच्चों की संख्या कम दिखाई देती है, जबकि अधिकतर बच्चे सड़कों पर घूमते नजर आते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि यदि किसी बच्चे के साथ कोई हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
इसके साथ ही मिड-डे मील को लेकर भी सवाल उठे हैं। शिकायत के अनुसार, “1 किलो दाल में 200 बच्चों को भोजन” जैसी स्थिति बताई जा रही है, जिसे अभिभावकों ने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया।

📚 शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
कुछ अभिभावकों का कहना है कि बड़े बच्चे छोटे बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जबकि शिक्षक लापरवाही बरत रहे हैं। इस पर सवाल उठाते हुए अभिभावकों ने कहा कि अगर बच्चों को ही पढ़ाना है, तो शिक्षकों की भूमिका क्या रह जाती है?
📄 दस्तावेजों में गड़बड़ी
जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड देने के बावजूद बच्चों के नाम रिकॉर्ड में सही दर्ज न होने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी है।
🎙️ क्या बोलीं प्रधानाध्यापिका रीति चौहान?
प्रधानाध्यापिका रीति चौहान ने इन आरोपों से बचते हुए स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया, लेकिन उन्होंने कहा कि विद्यालय में व्यवस्थाएं सुधारने का प्रयास किया जा रहा है और सभी कार्य नियमानुसार किए जा रहे हैं।
🎙️ सीईओ अमित चंद का बयान
सीईओ अमित चंद ने बड़े बच्चों द्वारा छोटे बच्चों को पढ़ाने को “अच्छी प्रक्रिया” बताया। उनका कहना है कि इससे बच्चों की नॉलेज और स्किल बढ़ती है।
वहीं, प्रधानाध्यापिका की पुनः बहाली पर उन्होंने कहा कि:
“उन्हें अपनी गलती का एहसास है और उन्होंने भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का आश्वासन दिया है।”
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या गलती लिखित रूप में स्वीकार की गई है, तो उन्होंने इससे इनकार किया और बताया कि स्वीकारोक्ति केवल मौखिक है।
⚖️ जिला शिक्षा अधिकारी का रुख
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यदि किसी को अपनी गलती का एहसास है, तो सजा देकर उसे सुधरने का मौका दिया जा सकता है। हालांकि, सजा क्या होगी—इस पर वे स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
👥 स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दिनेश ने भी प्रधानाध्यापिका पर कई आरोप लगाए।
कुछ अभिभावकों ने शिक्षकों पर बच्चों को मारने, खराब गुणवत्ता का भोजन देने और स्कूल से अनुपस्थित रहने जैसे आरोप लगाए हैं।
कई लोगों ने मांग की है कि विद्यालय की व्यवस्था सुधारने के लिए प्रधानाध्यापिका को हटाकर किसी सक्षम व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाए l
हेतमपुर का यह मामला अब सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई करता है या मामला यूं ही दबा दिया जाता है।



