“सनातन संस्कृति के संरक्षण का सशक्त केंद्र बना कार्ष्णि भक्ति धाम गुरुकुल, शास्त्र-वेद और योग से गढ़े जा रहे संस्कारित विद्यार्थी”


हरिद्वार (कमल शर्मा)।
श्यामपुर स्थित कार्ष्णि भक्ति धाम (गुरुकुलम्) में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं वैदिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन का कार्य निरंतर किया जा रहा है। गुरुकुल में विद्यार्थियों को शास्त्रों, वेदों और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं की विधिवत शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे वे ज्ञान के साथ-साथ उच्च संस्कारों से भी संपन्न बन सकें।
गुरुकुल में शिक्षा का आधार महर्षि पतंजलि की अष्टांग योग पद्धति है, जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का नियमित अभ्यास कराया जाता है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास पर विशेष बल दिया जाता है।


गुरुकुल में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए नित्य भोजन, शुद्ध पेयजल एवं आवश्यक आवासीय सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे वे पूर्ण एकाग्रता के साथ अध्ययन और साधना कर सकें।
इस अवसर पर कार्ष्णि स्वामी श्री अमृतानन्द जी महाराज ने कहा कि “आज की युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, वेदों और शास्त्रों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। गुरुकुल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। यहां विद्यार्थियों को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ अनुशासन, सेवा, संस्कार और योग की शिक्षा देकर एक आदर्श नागरिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, राष्ट्र उतना ही सशक्त और समृद्ध बनेगा।”


गुरुकुल के प्रबंधक ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैदिक परंपरा, आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक जीवन के संतुलन के साथ शिक्षित कर समाज एवं राष्ट्र की सेवा के लिए तैयार करना है। गुरुकुल निरंतर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और संस्कारयुक्त शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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