व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल हुए न्यायिक दस्तावेजों से संगठन में चर्चाएं तेज, पुराने आरोपों और शिकायतों ने फिर पकड़ा जोर; राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से निष्पक्ष जांच की उठी मांग
हरिद्वार (कमल शर्मा)। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की उत्तराखंड इकाई इन दिनों कथित विवादों को लेकर चर्चाओं में है। प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पंत से जोड़कर प्रसारित किए जा रहे गिरफ्तारी वारंट और कुर्की आदेश के दस्तावेजों ने पार्टी के अंदरूनी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। पार्टी के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में इन दस्तावेजों के वायरल होने के बाद प्रदेश संगठन से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
गिरफ्तारी वारंट और कुर्की आदेश के दस्तावेजों से बढ़ी चर्चा
प्रसारित दस्तावेजों में राजेंद्र कुमार नाम के व्यक्ति के विरुद्ध 30 अक्टूबर 2026 को जारी बताया जा रहा गिरफ्तारी वारंट तथा धारा 83 के अंतर्गत कुर्की कार्रवाई का आदेश शामिल है। दस्तावेजों में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 70 और चेक अनादरण से संबंधित परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 का उल्लेख भी दिखाई देता है।
हालांकि, इन दस्तावेजों में दर्ज राजेंद्र कुमार और RLD प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पंत एक ही व्यक्ति हैं या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में दस्तावेजों की प्रामाणिकता और संबंधित व्यक्ति की पहचान की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
पुरानी शिकायतों ने भी फिर पकड़ा जोर
इस प्रकरण के बीच पार्टी से जुड़े सूत्रों के हवाले से पूर्व में श्रीनगर के एक पूर्व सैनिक के साथ कथित ठगी की शिकायत का मामला भी चर्चा में आया है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस प्रकरण में पार्टी के एक प्रभावशाली नेता के नाम और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल हुआ था। इसके अतिरिक्त कुछ प्रदेश पदाधिकारियों की ओर से महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और अनुचित व्यवहार को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक शिकायतें पहुंचाए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं।
इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इनके दोबारा चर्चा में आने से संगठन की कार्यप्रणाली और शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
त्रिलोक त्यागी की भूमिका पर भी उठे सवाल
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री त्रिलोक त्यागी की भूमिका को लेकर भी पार्टी के अंदर चर्चा होने की बात कही जा रही है। संगठन से जुड़े कुछ सूत्रों का दावा है कि पूर्व में प्रदेश स्तर की शिकायतें राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई गई थीं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। एक महिला से जुड़े कथित प्रलोभन और अनुचित संपर्क के मामले में भी शिकायत किए जाने की चर्चा है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि उस समय प्रदेश कार्यकारिणी भंग कर दी गई थी।
हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि और संबंधित पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी शेष है।
जयंत चौधरी के रुख पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी और राष्ट्रीय संगठन इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं? क्या वायरल दस्तावेजों की सत्यता की जांच कराई जाएगी? क्या पूर्व में आई शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा होगी? और क्या प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पंत तथा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री त्रिलोक त्यागी सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे?
राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता केवल उनके सिद्धांतों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि संगठन के भीतर पारदर्शिता, जवाबदेही और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई से भी जुड़ी होती है। उत्तराखंड जैसे राज्य में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े किसी भी आरोप को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है।
अब देखना यह है कि राष्ट्रीय नेतृत्व इन सवालों पर चुप्पी साधता है या सामने आकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करता है। चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का उल्लेख करने वाले संगठन के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल भी महत्वपूर्ण है।













