सनातन संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेजना समय की सबसे बड़ी जरूरत: स्वामी रामदेव
भारतीय शिक्षा पद्धति, संस्कृति और सनातन मूल्यों पर देशभर से आए संतों एवं प्राचार्यों का होगा मंथन
हरिद्वार (कमल शर्मा)। पतंजलि विश्वविद्यालय में आज तीन दिवसीय 52वे अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के राज्यपाल श्री ढाल सिंह बेसम ने किया। इस अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण विशेष रूप से उपस्थित रहे। राज्यपाल के पतंजलि परिसर पहुंचने पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच उनका भव्य स्वागत किया गया।
सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति को बदनाम करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में अपनी विरासत, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को बचाना तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि “जब हम अपनी संस्कृति और अपने ज्ञान को समझेंगे, तभी अपनी वास्तविक पहचान और अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान पाएंगे।” उन्होंने आत्मबोध और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देते हुए कहा कि “मैं ही ब्रह्म हूं, मेरे ही अंदर राम हैं, कृष्ण हैं।” उनके अनुसार, भारतीय ज्ञान परंपरा मनुष्य को अपनी क्षमताओं को पहचानने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति, संस्कारों और सनातन मूल्यों को उचित स्थान देने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर विचार-विमर्श करना और इसे आधुनिक शिक्षा के साथ समन्वित करने की संभावनाओं पर चर्चा करना है।
तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए संत, प्राचार्य और शिक्षा जगत से जुड़े प्रतिनिधि भारतीय शिक्षा पद्धति, सांस्कृतिक विरासत, नैतिक शिक्षा तथा सनातन मूल्यों के विभिन्न पहलुओं पर मंथन करेंगे। सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के क्षेत्र में अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित यह सम्मेलन भारतीय शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण तथा उनके व्यापक प्रसार को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श का मंच बन रहा है।













