संत शिरोमणि स्वामी चन्दनदेव जी महाराज की पुण्य स्मृति में श्रद्धालुओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि, भंडारे में उमड़े भक्त
हरिद्वार (कमल शर्मा)। खड़खड़ी स्थित श्री चन्दन कृष्ण आश्रम में संत शिरोमणि, सिद्ध शिरोमणि एवं परम पूज्य श्री श्री 1008 स्वामी अवधूत श्री चन्दनदेव जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित 40वें श्रद्धांजलि समारोह एवं वार्षिक भंडारे का रविवार, 25 अक्टूबर को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ समापन हुआ। चार दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में संत-महात्माओं, महंतों, महामंडलेश्वरों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पूज्य गुरुदेव को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

आश्रम के परमाध्यक्ष महामहिम महंत स्वामी कृष्णस्वरूप जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित समारोह के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, अखंड पाठ, हवन, सत्संग और भंडारे के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान किया गया। आचार्य श्री गरीबदास जी की अमृतमयी वाणी तथा आचार्य श्री घीसासंत जी की अमृतमयी वाणी के पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों ने पूरे आश्रम परिसर को भक्तिमय बना दिया।
हवन, सत्संग और भंडारे के साथ हुआ समारोह का समापन
समारोह के अंतिम दिन प्रातःकाल हवन एवं पूर्णाहुति के उपरांत संत-महापुरुषों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने गुरु प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य माना। पूरे आयोजन में गुरु के प्रति श्रद्धा, सेवा, समर्पण और मानव कल्याण का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया।
इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों तथा षड्दर्शन साधु समाज से जुड़े संत-महात्माओं ने स्वामी चन्दनदेव जी महाराज की स्मृतियों को नमन करते हुए उनके आध्यात्मिक योगदान और गुरु परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।
गुरु की स्मृति और सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प
आश्रम के परमाध्यक्ष महामहिम महंत स्वामी कृष्णस्वरूप जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस समारोह ने श्रद्धालुओं को गुरु भक्ति, आध्यात्मिक साधना और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। भक्तों ने पूज्य गुरुदेव के चरणों में नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने तथा धार्मिक एवं सामाजिक सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
चार दिवसीय श्रद्धांजलि समारोह का समापन श्रद्धा, सत्संग और गुरु प्रसाद के साथ हुआ। आश्रम के भक्तगण एवं सहयोगियों ने आयोजन में सहभागिता करने वाले संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।













