सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संस्कृत के प्रतिभागियों को बताया अमूल्य निधि, मंत्री मदन कौशिक ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
हरिद्वार(कमल शर्मा)उत्तराखंड संस्कृत संस्थान, उत्तराखंड सरकार की ओर से आयोजित 18वें संस्कृत महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय संस्कृत स्पर्धा 2026-27 के दूसरे दिन महाजन भवन, भूपतवाला में विभिन्न प्रतियोगिताओं का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए छात्र-छात्राओं ने संस्कृत नाटक, श्लोकोच्चारण, समूहगान, समूहनृत्य, वाद-विवाद और आशुभाषण जैसी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विभिन्न स्पर्धाओं में डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, छिनकी फार्म खटीमा के प्रतिभागियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. नवीन चन्द्र पंत, सचिव एवं मुख्य समन्वयक प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार, वित्ताधिकारी माया देवी तथा शोध अधिकारी एवं राज्य समन्वयक डॉ. हरीश चन्द्र गुरुरानी ने मंचासीन अतिथियों का माल्यार्पण एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।
संस्कृत के विद्यार्थी हमारी अमूल्य निधि: त्रिवेंद्र सिंह रावत
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रतिभागियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि संस्कृत स्पर्धाओं में भाग लेने वाले छात्र-छात्राएं संस्कृत की अमूल्य निधि हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा से माता-पिता और गुरुजनों को गौरवान्वित किया है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ती है और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री एवं हरिद्वार विधायक मदन कौशिक ने कहा कि वर्तमान सरकार संस्कृत के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने संस्कृत को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण एवं प्रसार पर जोर दिया।
संस्कृत संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
सारस्वत अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने प्रदेश के शिक्षण संस्थानों द्वारा संस्कृत संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। अतिविशिष्ट अतिथि संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख सुदेव पुजारी ने कहा कि प्रदेशभर में आयोजित संस्कृत स्पर्धाओं से संस्कृतमय वातावरण तैयार हो रहा है।
विशिष्ट अतिथि संस्कृत भारती पश्चिमोत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रो. प्रेमचन्द्र शास्त्री ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। संस्कृत भारती उत्तराखंड के प्रांत संगठन मंत्री गौरव शास्त्री ने भी सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।
विभिन्न स्पर्धाओं में विजेताओं को किया सम्मानित
दूसरे दिन कनिष्ठ वर्ग में संस्कृत नाटक, श्लोकोच्चारण तथा वरिष्ठ वर्ग में संस्कृत समूहगान और श्लोकोच्चारण सहित विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन किया गया। समापन समारोह में मंचासीन अतिथियों ने विजेता प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीश चन्द्र गुरुरानी ने किया, जबकि उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. हरिगोपाल शास्त्री, डॉ. रविन्द्र आर्य, भूपेन्द्र गहतोड़ी, डॉ. विजय कुमार त्यागी, डॉ. सुशील कुमार त्यागी, डॉ. राधेश्याम बहुखंडी, डॉ. केशव दत्त बलियानी, रोशन लाल गौड़, प्रकाश चन्द्र तिवारी, पंडित हेमन्त तिवारी, गणेश फोन्दणी, डॉ. किशोरी लाल रतूड़ी, रमा कठैत, लीला रावत सहित अनेक संस्कृत शिक्षक-शिक्षिकाएं, शिक्षाविद् एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
स्पर्धाओं के प्रमुख परिणाम
वरिष्ठ वर्ग
संस्कृत नाटक: प्रथम—श्री भगवान दास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार; द्वितीय—डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा; तृतीय—राजकीय इंटर कॉलेज, बापरू, चंपावत।
संस्कृत समूहनृत्य: प्रथम—डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा; द्वितीय—नरेंद्र महिला विद्यालय इंटर कॉलेज, चंबा; तृतीय—आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज, रुड़की।
संस्कृत समूहगान: प्रथम—डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा; द्वितीय—आचार्यकुलम, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार; तृतीय—दुर्गादत्त कपि संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय, हल्द्वानी।
संस्कृत वाद-विवाद: प्रथम—पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, पतलट, नैनीताल की गुड्डू रूवाली एवं चन्दू त्रिपाठी; द्वितीय—पतंजलि गुरुकुलम, मूल्याग्राम, देवप्रयाग की जाह्नवी एवं प्रिया; तृतीय—श्री गुरु राम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय, देहरादून के नीरज बिजल्वाण एवं सौरभ तिवाड़ी।
संस्कृत आशुभाषण: प्रथम—पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार की शुभांगिनी आर्य; द्वितीय—राजकीय इंटर कॉलेज, पश्यां, नैनीताल की दीपिका परगांई; तृतीय—श्री दर्शन संस्कृत महाविद्यालय, मुनि की रेती के अक्षित बहुगुणा।
संस्कृत श्लोकोच्चारण: प्रथम—डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा की साक्षी भट्ट; द्वितीय—पतंजलि गुरुकुलम, देवप्रयाग की संध्या; तृतीय—श्री शक्तिपीठाश्रम संस्कृत विद्यालय, मनीला, अल्मोड़ा के भूपेश चन्द्र पाण्डे।
कनिष्ठ वर्ग
संस्कृत नाटक: प्रथम—डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा; द्वितीय—इंटर कॉलेज, गगरी गोल, गरुड़, बागेश्वर; तृतीय—ब्रिगेडियर विद्याधर जुयाल संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय, कोट, पौड़ी गढ़वाल।
संस्कृत समूहगान: प्रथम—डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा; द्वितीय—विजन पब्लिक स्कूल, चंपावत; तृतीय—केवीएम पब्लिक स्कूल, हल्द्वानी।
संस्कृत समूहनृत्य: प्रथम—पतंजलि गुरुकुलम, मूल्याग्राम, देवप्रयाग; द्वितीय—राजकीय इंटर कॉलेज, कोटद्वार; तृतीय—एस.एम.एस. दत्ता मेमोरियल नोजगे पब्लिक स्कूल, ऊधम सिंह नगर।
संस्कृत वाद-विवाद: प्रथम—श्रीमद् दयानंद आर्ष ज्योतिर्मठ गुरुकुल, पौंधा, देहरादून के प्रांजल एवं आरव; द्वितीय—आचार्यकुलम, हरिद्वार के शौर्यराज एवं गौरीका; तृतीय—डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल एकेडमी, खटीमा के कंचन लोहनी एवं किरत कौर।
संस्कृत आशुभाषण: प्रथम—श्री परशुराम चतुर्वेद विद्यालय, देहरादून के अर्जित नारायण उनियाल; द्वितीय—ब्रिगेडियर विद्याधर जुयाल संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय, कोट के तेजस बड़ोनी; तृतीय—श्री दर्शन संस्कृत महाविद्यालय, मुनि की रेती के केशव।
संस्कृत श्लोकोच्चारण: प्रथम—श्री शक्तिपीठ आश्रम संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय, मनीला, अल्मोड़ा के योगेश बलोदी; द्वितीय—श्री परशुराम चतुर्वेदी विद्यालय, देहरादून के आदित्य भट्ट; तृतीय—श्री दर्शन संस्कृत महाविद्यालय, मुनि की रेती के कृष्ण उनियाल।
विशेष पुरस्कार: सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार इंटर कॉलेज, गगरी गोल, गरुड़, बागेश्वर के दीपक कुमार को तथा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार डायनेस्टी मॉडर्न एकेडमी, छिनकी फार्म, खटीमा की इशिता चंद को प्रदान किया गया।













