दिल्ली के सभापुर से हरिद्वार के श्याम वैकुण्ठ धाम तक सजे बालाजी दरबार, दशहरा महापर्व पर श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ


बालाजी महाराज के भव्य दरबार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, धर्म और भक्ति के रंग में रंगे भक्त

हरिद्वार(कमल शर्मा)दशहरा महापर्व के पावन अवसर पर श्री बालाजी महाराज के भव्य दरबार एवं झांकी के आयोजन का श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में समापन हुआ। गोपाल जी महायज (अलवर वाले बाबा) के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर श्री बालाजी महाराज के दर्शन किए और सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना की। तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन के अंतर्गत दिल्ली के सभापुर स्थित हनुमान शिव मंदिर से लेकर हरिद्वार के श्री श्याम वैकुण्ठ धाम तक भक्ति की अलख जगाई गई।


कार्यक्रम के अंतर्गत 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार की रात्रि 10 बजे से बालाजी दरबार का शुभारंभ हुआ। इसके बाद 21 अक्टूबर को दोपहर दो बजे दिल्ली के सभापुर स्थित हनुमान शिव मंदिर में भव्य दरबार सजा। वहीं, 22 अक्टूबर, गुरुवार को दोपहर दो बजे हरिद्वार स्थित श्री श्याम वैकुण्ठ धाम में श्री बालाजी महाराज का भव्य दरबार आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और धार्मिक आयोजन में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।


इस अवसर पर श्री श्याम वैकुण्ठ धाम के पीठाधीश्वर स्वामी श्यामसुंदर दास महाराज ने कहा कि श्री बालाजी महाराज की भक्ति भक्तों को शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार, सेवा, सद्भाव और आपसी प्रेम की भावना को भी मजबूत करना है। ऐसे आयोजन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ ही सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।


स्वामी श्यामसुंदर दास महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भगवान के प्रति अपनी आस्था बनाए रखते हुए मानव सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और समाज में सद्भाव स्थापित करने के लिए भी आगे आएं। उन्होंने श्री बालाजी महाराज से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।
आयोजन के समापन पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने श्री बालाजी महाराज के जयकारों के साथ धर्म और भक्ति के इस पावन अवसर का लाभ उठाया। पूरे आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था से जोड़ने का संदेश दिया।

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