कुंभ के सौंदर्यीकरण की खुली पोल! NH-58 पर पौधारोपण दम तोड़ रहा, करोड़ों की तैयारियों पर उठे सवाल
देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर सूख रहे पौधे, कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच बदहाली बनेगी चिंता का विषय
हरिद्वार। आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के तहत हाईवे NH-58 के दोनों ओर सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से किया गया पौधारोपण अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। हरियाली बढ़ाने और मुख्य मार्ग को सुंदर बनाने के लिए लगाए गए पौधे सूखकर दम तोड़ रहे हैं। कहीं पौधे जमीन पर गिरे पड़े हैं, तो कहीं खड़े पौधे भी पूरी तरह सूखते नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कुंभ के सौंदर्यीकरण के नाम पर किए जा रहे कार्यों की निगरानी किस प्रकार हो रही है और सरकारी धन खर्च होने के बावजूद धरातल पर परिणाम शून्य क्यों दिखाई दे रहा है?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि NH-58 केवल एक सामान्य हाईवे नहीं, बल्कि देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इस मार्ग का इस्तेमाल प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, यात्री और पर्यटक करते हैं। आगामी कुंभ मेले के दौरान इसी मार्ग पर श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही और अधिक बढ़ने की संभावना है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण मार्ग का सौंदर्यीकरण और हरियाली की व्यवस्था बेहद जरूरी है। लेकिन पौधारोपण की मौजूदा स्थिति देखकर तैयारियों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पौधे लगाने में लापरवाही, देखभाल के अभाव में सूख रही हरियाली
हाईवे के दोनों ओर लगाए गए पौधों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पौधारोपण के दौरान उचित तरीके और तकनीक का ध्यान नहीं रखा गया। पौधों को व्यवस्थित तरीके से लगाने, उनकी जड़ों को मिट्टी में मजबूती से स्थापित करने और उन्हें पर्याप्त सहारा देने की आवश्यकता थी। इसके बावजूद कई पौधे जमीन पर गिरे दिखाई दे रहे हैं। वहीं, पौधों के आसपास ग्रीन जाली और सहारे की व्यवस्था होने के बाद भी उनकी उचित देखभाल नहीं हो सकी।
पौधों को नियमित पानी देने, उनकी निगरानी करने और उन्हें सूखने से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए थे। लेकिन मौजूदा हालात में बड़ी संख्या में पौधों के खराब होने की स्थिति सामने आ रही है। यदि समय रहते इनकी देखभाल नहीं की गई, तो शेष बचे पौधों के भी नष्ट होने की आशंका है।
कुंभ के मुख्य मार्ग पर बदहाली, सौंदर्यीकरण के दावों पर सवाल
कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में शहर की सड़कों, प्रमुख मार्गों और आसपास के क्षेत्रों को सुंदर एवं व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ये मार्ग शहर की पहली छवि प्रस्तुत करते हैं। ऐसे में देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार को जोड़ने वाले इस प्रमुख हाईवे पर पौधारोपण की दुर्दशा निश्चित रूप से चिंता का विषय है।
यदि पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल ही नहीं की जानी है, तो फिर इस पूरी कवायद का उद्देश्य क्या रह जाता है? पौधारोपण का मतलब केवल पौधे जमीन में लगा देना नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखना भी है। इसके लिए संबंधित विभाग, कार्यदायी संस्था और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संबंधित विभाग तत्काल करे निरीक्षण, जिम्मेदारी हो तय
इस मामले में संबंधित प्रशासन और विभाग से मांग है कि NH-58 के दोनों ओर लगाए गए पौधों की स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। पौधारोपण की गुणवत्ता, सिंचाई, सुरक्षा और रखरखाव की व्यवस्था की जांच कराई जाए। जहां पौधे सूख चुके हैं या जमीन पर गिर गए हैं, वहां नियमानुसार नए पौधे लगाए जाएं और उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पौधारोपण पर खर्च की गई धनराशि का अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिल रहा है। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
कुंभ के नाम पर सौंदर्यीकरण केवल दिखावा नहीं, बल्कि धरातल पर नजर आने वाला विकास होना चाहिए। जिस NH-58 से कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे, उसी मार्ग पर पौधों का सूखना और जमीन पर गिरना व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग समय रहते इस स्थिति को सुधारता है या फिर पौधारोपण के नाम पर खर्च हुई धनराशि का उद्देश्य अधूरा ही रह जाता है।
👉सारे ही पौधों ने दम तोड़ दिया है बची है तो केवल डंडियां कुछ गिरी हुई कुछ खड़ी हुई













