आचार्य राघव जी महाराज ने सुनाया मित्रता, त्याग और सच्ची भक्ति का संदेश, पितरों की स्मृति में आयोजित कथा में उमड़े श्रद्धालु
हरिद्वार (कमल शर्मा)। पितृ पक्ष के पावन अवसर पर स्वर्गीय श्री शान्ती स्वरूप अग्रवाल, स्वर्गीय श्रीमती शान्ती देवी अग्रवाल एवं स्वर्गीय श्री विशन स्वरूप गर्ग की स्मृति में श्री भगवान धाम कवीर आश्रम, भूपतवाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर हो गया। कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ब्रजधाम वालों ने सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और संक्षिप्त श्रीमद्भागवत के प्रसंगों का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेम, मित्रता, त्याग, विनम्रता और सच्ची भक्ति का संदेश दिया गया।

कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार के लिए निस्वार्थ प्रेम का अनुपम उदाहरण है। सुदामा की गरीबी और उनके सरल जीवन के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जिस प्रेम और सम्मान से अपनाया, वह सिखाता है कि सच्चे रिश्ते धन-दौलत से नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और आत्मीयता से बनते हैं।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी भी धन, पद और प्रतिष्ठा का अहंकार नहीं करना चाहिए। सच्ची भक्ति वही है, जिसमें स्वार्थ का कोई स्थान न हो और मन में भगवान के प्रति अटूट विश्वास हो। भगवान अपने भक्तों के भाव देखते हैं, उनके धन और वैभव को नहीं। सुदामा चरित्र हमें मित्रता निभाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और जीवन में सदैव विनम्र बने रहने की प्रेरणा देता है।
परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए आचार्य राघव जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मनुष्य को जीवन की नश्वरता का बोध कराता है और उसे सत्कर्म, सदाचार तथा ईश्वर भक्ति की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धर्म और संस्कारों को अपनाएं तथा परिवार एवं समाज में प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना को मजबूत करें।

इस अवसर पर शैलेंद्र अग्रवाल ने कहा कि पितरों की स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन आध्यात्मिक श्रद्धा के साथ-साथ पारिवारिक संस्कारों को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र आज के समाज के लिए विशेष संदेश देता है कि सच्ची मित्रता और रिश्तों की पहचान कठिन समय में होती है। मनुष्य को अपने जीवन में अहंकार त्यागकर प्रेम, सेवा और सहयोग को महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन के नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराया गया।
आयोजक श्रीमती सुमन गर्ग की ओर से पितरों की स्मृति में आयोजित इस श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शामिल सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंतिम दिवस पर पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण के साथ धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।













