गोवर्धन पूजन में गूंजे जयकारे, माखन लीला ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन पूजन
हरिद्वार (कमल शर्मा)। पितृ पक्ष के पावन अवसर पर स्वर्गीय श्री शान्ती स्वरूप अग्रवाल, स्वर्गीय श्रीमती शान्ती देवी अग्रवाल एवं स्वर्गीय श्री विशन स्वरूप गर्ग की स्मृति में श्री भगवान धाम कवीर आश्रम, भूपतवाला में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर हो गया। कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ब्रजधाम वालों ने श्रीमद्भागवत के नामकरण, माखन लीला और गोवर्धन पूजन सहित विभिन्न दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दिया।
कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला अपने आप में मानव जीवन के लिए एक संदेश है। उन्होंने कहा कि “भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं प्रेम, सरलता और निष्कपट भक्ति का संदेश देती हैं। गोवर्धन पूजन हमें प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ अहंकार का त्याग करने की प्रेरणा देता है। मनुष्य को भगवान की भक्ति के साथ अपने कर्मों और संस्कारों को भी श्रेष्ठ बनाना चाहिए।”
माखन लीला और गोवर्धन पूजन के प्रसंग के दौरान कथा पंडाल में श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा आश्रम परिसर गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का आनंद लिया।
इस अवसर पर शैलेंद्र अग्रवाल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कारों और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि “भागवत कथा से मनुष्य को धर्म के साथ-साथ परिवार, समाज और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का बोध होता है। ऐसे आयोजनों में सभी को बढ़-चढ़कर सहभागिता करनी चाहिए।”
राहुल अग्रवाल ने कहा कि पितरों की स्मृति में आयोजित यह भागवत कथा परिवार के लिए आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि “भागवत कथा के श्रवण से मन को शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मक एवं धार्मिक वातावरण का निर्माण होता है। पितरों के निमित्त किया गया यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा और संस्कारों का सुंदर संगम है।”
वहीं हिमानी अग्रवाल ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं बच्चों और युवाओं को सनातन संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि “हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। श्रीमद्भागवत कथा इसके लिए एक सशक्त माध्यम है।”
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में सहभागिता की और गोवर्धन पूजन प्रसंग पर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन नामकरण, माखन लीला और गोवर्धन पूजन प्रसंगों का हुआ भावपूर्ण वर्णन













