118 वर्ष पुरानी जर्जर संपत्ति के सुरक्षा निरीक्षण और बकाया किराये के निष्पक्ष आकलन की मांग, परमाध्यक्ष ओम प्रकाश शास्त्री एवं मुख्य सचिव अजय गौतम ने उठाई आवाज
हरिद्वार (कमल शर्मा)। हरिद्वार के भूपतवाला रोड स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक श्री कमल दास कुटिया आश्रम की संपत्ति और बकाया किराये का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कमल दास कुटिया ट्रस्ट (रजि.) ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर आश्रम के लगभग 100 कमरों का बकाया किराया दिलवाने, जर्जर भवन का सुरक्षा निरीक्षण कराने तथा आगामी अर्धकुंभ से पूर्व आश्रम को विधिसम्मत रूप से खाली एवं कब्जामुक्त करवाने की मांग की है। ट्रस्ट के अनुसार, वर्ष 1988 में आश्रम के लगभग 100 कमरे किराये पर दिए गए थे, जिनका पिछले करीब 29 वर्षों से किराया प्राप्त नहीं हुआ है। आश्रम पक्ष ने बकाया किराये का अनुमान 20 करोड़ रुपये से अधिक बताया है।
कमल दास कुटिया ट्रस्ट के परमाध्यक्ष महंत श्री ओम प्रकाश शास्त्री जी ने कहा कि आश्रम एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर है, जिसका संरक्षण और रखरखाव अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से किराया नहीं मिलने के कारण आश्रम की धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि संबंधित विभागों को निर्देशित कर बकाया किराये का निष्पक्ष एवं विधिसम्मत आकलन कराया जाए और आश्रम को उसके वैध अधिकारों के अनुरूप बकाया धनराशि दिलाने की कार्रवाई की जाए।
जर्जर भवन की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि लगभग 118 वर्ष पुरानी आश्रम की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। ऐसे में भवन में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए तत्काल तकनीकी जांच और सुरक्षा निरीक्षण कराने की मांग की गई है।
ट्रस्ट के मुख्य सचिव श्री अजय गौतम ने कहा कि जर्जर भवन की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को समय रहते आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए भवन का तकनीकी निरीक्षण कराया जाना और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। आश्रम पक्ष ने पत्र के माध्यम से प्रशासन को संभावित खतरे से अवगत कराते हुए समय रहते कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
अर्धकुंभ से पहले आश्रम को खाली कराने की मांग
मुख्य सचिव अजय गौतम ने कहा कि श्री कमल दास कुटिया आश्रम की धार्मिक गरिमा और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए आगामी अर्धकुंभ से पूर्व आश्रम को विधिसम्मत रूप से खाली एवं कब्जामुक्त करवाने की कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे आश्रम की मरम्मत, संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट मुख्यमंत्री से अपेक्षा करता है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आश्रम की संपत्ति और उसके वैध हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
छह प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का अनुरोध
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में ट्रस्ट ने वर्ष 1988 में किराये पर दिए गए लगभग 100 कमरों के बकाया किराये का निष्पक्ष आकलन कराने, करीब 29 वर्षों की बकाया धनराशि नियमानुसार दिलवाने, जर्जर संपत्ति का तत्काल तकनीकी एवं सुरक्षा निरीक्षण कराने, संभावित दुर्घटना रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने, अर्धकुंभ से पूर्व आश्रम को विधिसम्मत रूप से कब्जामुक्त कराने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री से इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार, जिलाधिकारी हरिद्वार तथा संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है।













