अमेरिकन आश्रम की जमीन पर बड़ा सवाल: 2009 से चल रही फाइल का सच कब आएगा सामने?जांच हुई, फाइल चली… फिर भी रिपोर्ट क्यों नहीं? दस्तावेजों के घेरे में भूपतवाला की करोड़ों की जमीन


अमेरिकन आश्रम की जमीन पर विवाद गहराया: आरोपों से आगे अब दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का इंतजार


हरिद्वार। भूपतवाला स्थित ऐतिहासिक अमेरिकन आश्रम/स्वामी देवानंद ट्रस्ट की भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब महज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। मामले में पुराने राजस्व अभिलेखों, सरकारी नक्शों, पूर्व में हुई जांचों तथा विभिन्न स्तरों पर चली पत्रावलियों को सार्वजनिक कर पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।


बताया जा रहा है कि इस भूमि को लेकर पूर्व में भी मुख्यमंत्री पोर्टल सहित संबंधित प्रशासनिक स्तरों पर शिकायतें एवं जांच प्रक्रिया चली है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि मामले की जांच पहले हो चुकी है और संबंधित फाइल वर्षों से सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद है, तो अब तक प्रशासन की ओर से उसकी अंतिम स्थिति अथवा जांच रिपोर्ट स्पष्ट रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले में राजस्व रिकॉर्ड, भूमि के स्वामित्व, सीमांकन, पुराने नक्शों और मौके की वर्तमान स्थिति का निष्पक्ष मिलान होना आवश्यक है।


मौके की तस्वीरों में भूमि पर मिट्टी भराव एवं समतलीकरण दिखाई देता है, जबकि दूसरी ओर आश्रम/ट्रस्ट का परिसर बंद नजर आ रहा है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि भूमि पर किए गए कार्य किसकी अनुमति से हुए और संबंधित विभागों के अभिलेखों में इसकी क्या स्थिति दर्ज है।


2009 से विवाद चलने का दावा, जांच की मांग तेज
मामले से जुड़े लोगों की ओर से यह दावा भी किया जा रहा है कि वर्ष 2009 से ही भूमि को लेकर विवाद और कथित भू-माफिया गतिविधियों का सिलसिला चला आ रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि इतने लंबे समय से मामला विभिन्न स्तरों पर उठता रहा है तो प्रशासन को पूरे प्रकरण की समयबद्ध जांच कर वास्तविक तथ्यों को समाज के सामने रखना चाहिए।


विवाद से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि भूमि संबंधी मामले में सक्रिय रहने के कारण उन्हें बदनाम करने और संस्था से दूर करने का कथित प्रयास किया जा रहा है। इन आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में विवाद की पृष्ठभूमि क्या है और इसके पीछे कौन-कौन से पक्ष सक्रिय हैं।


जनप्रतिनिधि की सोशल मीडिया गतिविधि पर भी उठे सवाल
मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि विदित शर्मा की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी सोशल मीडिया आईडी से कमलेश उनियाल से संबंधित खबरों/मामले को साझा या पोस्ट किया है। वहीं, संबंधित संस्था स्वामी दयानंद भारती योग आश्रम से जुड़ा भूमि विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने की बात भी कही जा रही है।
यदि संबंधित भूमि अथवा संस्था को लेकर कोई मामला न्यायालय में लंबित है, तो उसके दस्तावेज, वाद की वर्तमान स्थिति और संबंधित पक्षों की भूमिका को आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट किया जाना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति या संस्था पर लगाए गए आरोपों को तब तक अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता, जब तक सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया से उसकी पुष्टि न हो।
अब सबसे बड़ा सवाल—फाइल कब खुलेगी और रिपोर्ट कब आएगी?
पूरे प्रकरण में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि पुरानी शिकायतों, सरकारी नक्शों, राजस्व अभिलेखों और पूर्व में हुई जांच की फाइलों में आखिर क्या दर्ज है? यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? और यदि जांच अधूरी है तो उसे अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया?
अमेरिकन आश्रम की इस भूमि का विवाद जितना पुराना बताया जा रहा है, उतना ही जरूरी हो गया है कि प्रशासन बिना किसी दबाव के दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच करे। भूमि का वास्तविक स्वामित्व, रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति, सीमांकन, भूमि उपयोग, पूर्व जांच और मौके पर हुए निर्माण अथवा मिट्टी भराव—हर बिंदु की तथ्यात्मक जांच सामने आनी चाहिए।
क्योंकि अब सवाल किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे विवाद का सच सामने लाने का है।
जनता के सामने आए पूरा सच
किसके नाम है भूमि?
सरकारी रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?
पूर्व की जांच में क्या निष्कर्ष निकला?
फाइल वर्षों से लंबित क्यों रही?
मौके पर हुए बदलाव की अनुमति किसने दी?
और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है?
इन सभी सवालों का जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और न्यायिक रिकॉर्ड से मिलना चाहिए। यही पारदर्शिता इस पूरे विवाद पर उठ रहे सवालों का स्थायी समाधान दे सकती है।

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