श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा संत करुणामयी गुरुमाँ का संत प्राकट्य दिवस,रुद्राभिषेक, चरण पादुका पूजन, संगीतमय सुंदरकांड और भव्य भजन संध्या के होंगे आयोजन

हरिद्वार। श्री सच्चा कृपा फाउंडेशन के तत्वावधान में परम पूज्य संत सच्चा बाबा जी महाराज की प्रेरणा एवं परम पूज्या संत करुणामयी गुरुमाँ की पावन स्मृतियों को समर्पित “संत प्राकट्य दिवस” का आयोजन 25 अगस्त 2026 को हरिद्वार में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
आयोजकों के अनुसार पूज्य गुरुमाँ का माँ गंगा से अत्यंत आत्मिक और अनुपम संबंध रहा है। उन्होंने अपनी साधना के अनेक अमूल्य क्षण हरिद्वार और ऋषिकेश की पावन धरती पर गंगा के सानिध्य में बिताए। इसी कारण हरिद्वार को गुरुमाँ की मधुर स्मृतियों और दिव्य उपस्थिति का साक्षी मानते हुए इस वर्ष भी उनका पावन जन्मोत्सव “संत प्राकट्य दिवस” के रूप में मनाया जा रहा है।


कार्यक्रम की शुरुआत 24 अगस्त को सायं 4 से 6 बजे तक प्रयाग के मूर्धन्य विद्वानों द्वारा भव्य रुद्राभिषेक से होगी। इसके पश्चात सायं 6 से 8 बजे तक पानीपत के भैया रवि आहूजा द्वारा भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी।
25 अगस्त को प्रातः 9 से 10 बजे तक गुरुमाँ की चरण पादुका का षोडशोपचार पूजन होगा। प्रातः 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अयोध्या धाम के पंकज व्यास जी के सानिध्य में संगीतमय सुंदरकांड पाठ होगा। सायं 5 से 8 बजे तक “एक शाम गुरु जी के नाम” भव्य संगीत संध्या आयोजित की जाएगी। इसके बाद सायं 8:30 बजे से प्रभु इच्छा तक प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन होगा।


कार्यक्रम का मंच संचालन पानीपत के श्री वेद बांगा जी करेंगे। आयोजन अग्रवाल भवन, महाराजा अग्रसेन सेवा सदन ट्रस्ट (रजि.) में होगा।
समारोह में परम पूज्य गुरुदेव एवं गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानन्द जी महाराज, परम पूज्य श्री श्री 1008 महंत श्री राम सुखदास जी महाराज, परम पूज्य श्री 1008 स्वामी श्री दयानन्द सरस्वती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी श्री अरुण दास जी महाराज, परम पूज्य श्री धर्मवीर जी महाराज, सिद्धस्रोत हरिद्वार तथा गद्दीवशीन गुरुद्वारा शाह साहिब जी पानीपत के सरदार गुरुविन्दर शाह सिंह जी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
आयोजन में सच्चा कृपा फाउंडेशन, पानीपत तथा श्री सनातन सभा-भीमगोड़ा मंदिर, वार्ड नंबर 9 का विशेष सहयोग रहेगा।
आयोजक साध्वी सिद्धी अंशू गुप्ता ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित इस आध्यात्मिक उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पूज्य गुरुमाँ की दिव्य स्मृतियों को नमन करें और उनके आशीर्वाद के सहभागी बनें।
उन्होंने कहा कि संत शरीर तक सीमित नहीं होते, बल्कि शाश्वत चेतना के स्वरूप होते हैं। गुरु का स्मरण जहां होता है, वहीं उनका सानिध्य अनुभव किया जा सकता है और उनकी कृपा से जीवन में सच्चे प्रकाश का उदय होता है।
“जो पारस सोना करे, वो पारस है कच्चा।
जो पारस-पारस करे, वो पारस है सच्चा।”

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