कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
हरिद्वार, 30 सितम्बर
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, ऋषिकुल परिसर के पंचकर्म विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर हर्रावाला के परिसर निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) प्रो. (डॉ.) के.के. शर्मा आज अपने 37 वर्षों की गौरवशाली सेवा यात्रा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
विशेष उल्लेखनीय है कि सेवानिवृत्ति से ठीक दो दिन पहले, उन्होंने अदम्य ऊर्जा और समर्पण के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय पंचकर्म कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन किया, जिसमें देश-विदेश से लगभग 500 शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह आयोजन उनकी नेतृत्व क्षमता, सक्रियता और आयुर्वेद के प्रति उनकी गहरी निष्ठा का प्रमाण है।
29 सितम्बर को महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह द्वारा उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके दीर्घकालीन योगदान और उत्कृष्ट सेवाओं की स्वीकृति है।
पिछले लगभग चार दशकों की सेवा अवधि में प्रो. शर्मा ने न केवल शैक्षणिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया, बल्कि पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से हजारों मरीजों को नई जिंदगी दी। उन्होंने विभागीय कार्यों के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासनिक दायित्वों को भी पूरी निष्ठा और गरिमा के साथ निभाया।¹
सम्मेलन में कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार त्रिपाठी, पंतजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण, आयुष विभाग के अपर सचिव एवं निदेशक डॉ. विजय कुमार जोगदांडे सहित अनेक वरिष्ठ विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों ने उनकी सेवाओं और योगदान की सराहना की।
प्रो. (डॉ.) शर्मा के नेतृत्व में पंचकर्म विभाग ने नई ऊँचाइयों को छुआ और उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई।
उनकी सेवानिवृत्ति पर विश्वविद्यालय परिवार, छात्र-छात्राएँ और सहकर्मी भावुक हैं। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
