“बैठकों में भव्य कुंभ, ज़मीनी हकीकत अधूरी—2027 महाकुंभ तैयारियों पर उठे बड़े सवाल”

हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 को लेकर जहां एक ओर शासन-प्रशासन की बैठकों का दौर लगातार जारी है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर तैयारियों की रफ्तार कई सवाल खड़े कर रही है। कुंभ मेला बनाम अर्धकुंभ के बीच योजनाओं और बैठकों का यह सिलसिला अब “बैठक दर बैठक” तक सीमित होता नजर आ रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, मुख्य सचिव, गढ़वाल कमिश्नर, मेला अधिकारी और अपर मेला अधिकारी लगातार बैठकों के जरिए कुंभ कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा भी कुंभ 2027 को “भव्य और दिव्य” बनाने की घोषणा के बाद प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी है और करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री का कहना है कि मोक्ष और कल्याण की कामना लेकर आने वाले श्रद्धालु सकुशल स्नान कर अपने घर लौटें, इसके लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल नेटवर्क, अस्पताल, गंगा घाट, आंतरिक सड़कें और नए पार्किंग स्थल विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं।
लेकिन हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। सैकड़ों परियोजनाएं अभी तक स्वीकृति का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ये कार्य कब स्वीकृत होंगे और कब तक धरातल पर पूरे हो पाएंगे—यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में ही है।
हालांकि मेला अधिकारी को 1 करोड़ रुपये और गढ़वाल कमिश्नर को 5 करोड़ रुपये तक के कार्य स्वीकृत करने के अधिकार दिए गए हैं, लेकिन इससे भी गति में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है।
कुंभ जैसे विशाल आयोजन में जहां आस्था का संगम होता है, वहीं इसके “अमृत” का लाभ लेने के लिए राजनेता, अधिकारी, ठेकेदार और बिचौलिये भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसका उदाहरण गंगनहर पर निर्माणाधीन गंगा घाट हैं, जो निम्न गुणवत्ता और लापरवाही के चलते निर्माण काल में ही बह गए।
वहीं मेला अधिकारी का ड्रीम प्रोजेक्ट CCR-2 भी सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि इसमें जंग लगे सरियों का इस्तेमाल हो रहा है, जबकि अधिकारी इसे जांच में सही बता रहे हैं।
इन सबके बीच मेला अधिकारी सोनिका सिंह ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समय सीमा में पूरे किए जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सभी कार्य निर्धारित समय में पूरे हो जाएंगे।
अब देखना यह होगा कि कुंभ 2027 की भव्यता सिर्फ बैठकों और दावों तक सीमित रहती है या फिर धरातल पर भी वैसी ही तस्वीर नजर आती है, जिसकी अपेक्षा करोड़ों श्रद्धालु कर रहे हैं।

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