श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह और महारास की अमृतवर्षा में डूबा श्री यंत्र मंदिर, कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु


हरिद्वार, कनखल (कमल शर्मा)। कनखल स्थित श्री यंत्र मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास नीरज जोशी ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, कंस वध एवं महारास की अलौकिक लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा व्यास श्री नीरज जोशी ने कहा कि महारास केवल एक लीला नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का अद्भुत आध्यात्मिक प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने अहंकार, मोह और विकारों को त्यागकर प्रभु की शरण में आता है, तभी उसे सच्चे आनंद और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह प्रसंग हमें प्रेम, समर्पण और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, जबकि कंस वध यह संदेश देता है कि अधर्म और अत्याचार का अंत निश्चित है। कथा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन में झूमते रहे और पूरा पंडाल “राधे-राधे” व “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।


इस अवसर पर हरि चेतनानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समाज को आध्यात्मिक चेतना देने का महान माध्यम है। उन्होंने कहा कि कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में संस्कारों की स्थापना होती है।


वहीं आयोजन से जुड़े प्रकाश जोशी ने कहा कि कथा का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कृति और मानवता के मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं और पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लेकर परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *