शरद पूर्णिमा पर मछला कुंड स्थित श्री गंगादास उदासीन महाराज के आश्रम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, विशाल भंडारे में संतों और श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी



संत-महात्माओं के सानिध्य में भक्तिमय हुआ वातावरण, सेवा और समर्पण के संदेश से गूंजा आश्रम परिसर
हरिद्वार (कमल शर्मा)। धर्मनगरी हरिद्वार में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 26 अक्टूबर 2026 को मछला कुंड स्थित टीले पर श्री गंगादास उदासीन महाराज के आश्रम में विशाल भंडारे का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। धार्मिक आयोजन में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर प्रसादी ग्रहण की। आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और सेवा, समर्पण तथा मानव कल्याण का संदेश प्रसारित हुआ।
इस अवसर पर श्री गंगादास उदासीन महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा भारतीय सनातन परंपरा में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखने वाला पर्व है। ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में धर्म, संस्कार और सेवा की भावना मजबूत होती है। संत-महात्माओं का सानिध्य मनुष्य को सद्मार्ग पर चलने तथा जरूरतमंदों की सेवा करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भंडारा केवल भोजन वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में समानता, सद्भाव और परस्पर प्रेम की भावना को मजबूत करने का पुण्य कार्य है।
श्रीमती विमला देवी ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की सार्थकता तभी है, जब उनसे समाज में सेवा, करुणा और भाईचारे की भावना का विस्तार हो। भंडारे जैसे आयोजन लोगों को आपसी भेदभाव भुलाकर एक साथ बैठने और प्रेमपूर्वक प्रसादी ग्रहण करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद और प्रभु की भक्ति से मानव जीवन में सकारात्मकता आती है तथा समाज में सद्भाव का वातावरण निर्मित होता है।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस विशाल भंडारे ने धर्मनगरी की संत परंपरा और सेवा भावना को उजागर किया। श्रद्धालुओं ने आश्रम में पहुंचकर प्रसादी ग्रहण की तथा धार्मिक आयोजन के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धर्म, भक्ति और सेवा ही समाज को प्रेम, सद्भाव और मानवता के सूत्र में बांधने का सशक्त माध्यम हैं।

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