पितृ अमावस्या पर सप्तऋषि क्षेत्र में लगा विशाल भंडारा, महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट ने पेश की सेवा और समर्पण की मिसाल

पितृ अमावस्या पर आयोजित विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

ठोकर नंबर पांच पर आयोजित हुआ विशाल भंडारा, संत सेवा और गोसेवा को बताया पुण्य का मार्ग
हरिद्वार (कमल शर्मा)। धर्मनगरी हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र स्थित ठोकर नंबर पांच पर पितृ अमावस्या के पावन अवसर पर महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट की ओर से विशाल एवं भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव से आयोजित इस भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। ट्रस्ट की ओर से प्रत्येक अमावस्या पर नियमित रूप से भंडारे का आयोजन किया जाता है, लेकिन पितृ अमावस्या के विशेष महत्व को देखते हुए इस बार भंडारे को विशेष स्वरूप प्रदान किया गया। यह ट्रस्ट का 553वां भंडारा रहा, जो निरंतर सेवा, समर्पण और धार्मिक परंपराओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


इस अवसर पर पंचदशनाम जूना अखाड़ा महामंडलेश्वर श्री विश्वापुरी जी महाराज, अध्यक्ष महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट एवं ने कहा कि पितृ पअमावस्या पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और उनके स्मरण का विशेष पर्व है। भारतीय संस्कृति में पितरों के निमित्त दान-पुण्य, अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल भंडारे का आयोजन करना ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, करुणा और धर्म के संस्कारों को मजबूत करना भी है। इसी भावना के साथ प्रत्येक अमावस्या पर भंडारा आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही गोसेवा और संतों की सेवा-पूजा भी नियमित रूप से की जाती है। उन्होंने कहा कि नर सेवा, संत सेवा और गोसेवा के माध्यम से मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।


कार्यक्रम में उपस्थित महामंडलेश्वर श्री विश्वपुरी जी महाराज के गुरु श्री राम बालक पुरी जी महाराज ने पितृ अमावस्या के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में पितरों का स्मरण करना अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। इस दिन श्रद्धा के साथ किए गए दान-पुण्य, अन्नदान और सेवा कार्यों का विशेष महत्व माना गया है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के बताए संस्कारों और आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ जरूरतमंदों की सहायता, संतों की सेवा और गोसेवा जैसे पुण्य कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लें।
इस अवसर पर महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट के महामंत्री श्री राजवीर शर्मा ने कहा कि ट्रस्ट लंबे समय से धार्मिक आयोजनों और जनसेवा के कार्यों में निरंतर सक्रिय है। प्रत्येक अमावस्या पर भंडारे का आयोजन इसी सेवा परंपरा का हिस्सा है। पितृ अमावस्या पर आयोजित विशेष भंडारा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के साथ-साथ समाज में सेवा और सद्भाव का संदेश देने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट भविष्य में भी इसी प्रकार धार्मिक, सामाजिक और सेवाभावी गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा।
कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा के दर्शन के साथ संत सेवा, गोसेवा और अन्नदान के महत्व को रेखांकित किया गया। श्रद्धा एवं सेवा भाव से संपन्न हुए इस आयोजन ने सनातन संस्कृति की उस परंपरा को सशक्त किया, जिसमें अन्नदान को पुण्य, सेवा को साधना और परोपकार को मानव जीवन का महत्वपूर्ण धर्म माना गया है l

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