सिर्फ पुस्तको नहीं, रचनात्मक गतिविधियों द्वारा भी महापुरूषों के विचारों को आत्मसात करना जरूरी: स्वामी आर्यवेश
भिवानी, 10 अक्टूबर। बच्चों को केवल पुस्तकों के माध्यम से महापुरुषों के जीवन से परिचित करवाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनके विचारों को समझने और आत्मसात करने का अवसर भी देना चाहिए। ये उद्गार आज सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्यवेश महाराज ने अग्रवाल वैश्य समाज द्वारा महाराजा अग्रसेन जयंती के उपलक्ष्य में आदर्श महिला महाविद्यालय में आयोजित चित्रकलां प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह को बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि चित्रकला प्रतियोगिता इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिसके लिए अग्रवाल वैश्य समाज प्रशंसा का पात्र है। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन केवल अग्रवाल समाज के आदर्श पुरुष ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए सेवा, समानता, सहयोग और परोपकार की प्रेरणा हैं। उनका ‘एक ईंट-एक रुपया’ का सिद्धांत सामाजिक सहभागिता और सामूहिक विकास का अनूठा उदाहरण है। स्वामी जी ने कहा कि आज के बच्चों को अपनी संस्कृति और महान व्यक्तित्वों के विचारों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय वर्ण में जन्म लेकर जिस प्रकार उन्होंने स्वयं को वैश्य वर्ण में धारण कर सम्पूर्ण समाज को समाजवाद की अवधारणा से विश्व को अवगत करवाया और मानवजाति का उद्धार किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में सबसे बड़ी जरूरत महापुरुषों को केवल याद करना नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करने की है, ताकि उनके संदेश और उनकी शिक्षाएं आयोजनों तक सीमित न रहें, बल्कि हमारे व्यवहार, सोच और कार्यशैली का हिस्सा बनें।
अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि चित्रकला केवल रंगों और रेखाओं का संयोजन नहीं, बल्कि मन में बसे विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करने की सशक्त विधा है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतियोगिता में भाग लेना ही अपने आप में उपलब्धि है और विद्यार्थियों को इसी प्रकार अपनी प्रतिभा को निरंतर निखारते रहना चाहिए। कहा कि महाराजा अग्रसेन के जीवन एवं उनके सिद्धांतों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत कर विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों के प्रति अपनी समझ भी प्रदर्शित की है।
प्राईवेट स्कूल वेलफेयर के अध्यक्ष रामअवतार शर्मा ने कहा कि चित्रकला जैसी रचनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ महाराजा अग्रसेन के जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की भागीदारी और उत्साह यह दर्शाता है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और सामाजिक विरासत से जुड़ने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि ‘एक ईंट-एक रुपया’ का सिद्धांत आज भी समाज में सहयोग और सामूहिक विकास की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर अग्रवाल वैश्य समाज के साहित्य एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के महासचिव प्रो. विपिन गुप्ता, आदर्श महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डाॅ. अलका मित्तल, बाबू लाल आर्य, समाज के विधानसभा अध्यक्ष सतीश वैद, महासचिव आशीष मित्तल, कोषाध्यक्ष अखिल मित्तल, उमेश बंसल, दीपक तौला सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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15 स्कूलों से 110 बच्चों ने लिया प्रतियोगिता में हिस्सा
प्रतियोगिता के दौरान 15 स्कूलों के 110 बच्चों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपने रंगों और कल्पनाशीलता के माध्यम से महाराजा अग्रसेन के व्यक्तित्व, उनके सामाजिक चिंतन, समानता की भावना, परस्पर सहयोग तथा समाज सेवा के संदेश को चित्रों में उकेरा। बच्चों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों में उनकी रचनात्मक सोच और विषय की समझ स्पष्ट रूप से दिखाई दी। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और एकाग्रता के साथ निर्धारित समय में अपनी कलाकृतियां तैयार कीं।
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ये रहा परिणाम
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को दो विषयों में से किसी एक विषय पर चित्र बनाने का अवसर दिया गया था। निर्णायक मंडल ने विषय की समझ, रचनात्मकता, प्रस्तुतीकरण, रंग संयोजन और कलात्मक अभिव्यक्ति के आधार पर प्रतिभागियों की कलाकृतियों का मूल्यांकन करते हुए टीआईटी सी.सै. स्कूल की छात्रा रितिका ने प्रथम स्थान, लिटिल हार्ट इंटरनेशनल स्कूल के छात्र यश को द्वितीय एवं वैश्य माॅडल सी.सै. स्कूल के छात्र जयंत शर्मा को तृतीय स्थान के लिए विजेता चुना गया। विजेताओं को मोमंटो के साथ क्रमशः प्रथम पुरस्कार 2100 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 1100 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 500 रुपये प्रदान किया गया। इसके साथ ही प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।













