हरिद्वार (कमल शर्मा)। पितृ पक्ष के समस्त पितरों के निमित्त भूपतवाला स्थित श्री भगवान धाम कबीर आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य राघव जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति, धर्म और सदाचार का मार्ग बताया। कथा के दौरान परीक्षित जन्म, कुंती स्तुति, भीष्म स्तुति तथा हिरण्यकश्यप उद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
आचार्य राघव जी महाराज ने राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने माता कुंती की स्तुति के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का संदेश दिया। इसके बाद भीष्म स्तुति का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भीष्म पितामह की भक्ति और अंतिम समय में प्रभु के स्मरण की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कथा में हिरण्यकश्यप उद्धार का प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। महाराज ने बताया कि अहंकार और अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। भगवान की भक्ति में अटूट विश्वास रखने वाले भक्त की रक्षा स्वयं परमात्मा करते हैं।
कथा के दौरान भजनों और धार्मिक प्रसंगों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण किया और पितरों की शांति एवं परिवार के कल्याण की कामना की।
श्रीमद्भागवत कथा 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जा रही है। 9 अक्टूबर को पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण किया जाएगा। कथा का आयोजन श्रीमती सुमन गर्ग, पत्नी स्वर्गीय विशन स्वरूप गर्ग द्वारा पितरों के निमित्त कराया जा रहा है।
परीक्षित जन्म से लेकर हिरण्यकश्यप उद्धार तक, भागवत कथा में गूंजा भक्ति और धर्म का संदेश













