“गुरु भक्ति से सराबोर हुआ हरिद्वार, दिव्य स्मृतियों के बीच संपन्न हुआ संत प्राकट्य दिवस”


गुरुमाँ की पावन स्मृतियों में गूंजा हरिद्वार, श्रद्धा-भक्ति से मनाया संत प्राकट्य दिवस
हरिद्वार। श्री सच्चा कृपा फाउंडेशन के तत्वावधान में परम पूज्य संत सच्चा बाबा जी महाराज की प्रेरणा एवं परम पूज्या संत करुणामयी गुरुमाँ की पावन स्मृतियों को समर्पित “संत प्राकट्य दिवस” का आयोजन अग्रवाल भवन, महाराजा अग्रसेन सेवा सदन ट्रस्ट में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। दो दिवसीय आयोजन में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर गुरुमाँ की पावन स्मृतियों को नमन किया और संत परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।


समारोह के दौरान रुद्राभिषेक, भजन संध्या, गुरुमाँ की चरण पादुका का षोडशोपचार पूजन, संगीतमय सुंदरकांड पाठ तथा “एक शाम गुरु जी के नाम” संगीत संध्या ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। अयोध्या धाम के पंकज व्यास जी के सानिध्य में सुंदरकांड पाठ तथा पानीपत के भैया रवि आहूजा की भजन प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।


समारोह में परम पूज्य गुरुदेव एवं गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानन्द जी महाराज, परम पूज्य श्री श्री 1008 महंत श्री राम सुखदास जी महाराज, परम पूज्य श्री 1008 स्वामी श्री दयानन्द सरस्वती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी श्री अरुण दास जी महाराज, परम पूज्य श्री धर्मवीर जी महाराज, सिद्धस्रोत हरिद्वार तथा गद्दीवशीन गुरुद्वारा शाह साहिब जी पानीपत के सरदार गुरुविन्दर शाह सिंह जी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा बढ़ाई।


कार्यक्रम का मंच संचालन पानीपत के श्री वेद बांगा जी ने किया। आयोजन में सच्चा कृपा फाउंडेशन, पानीपत तथा श्री सनातन सभा-भीमगोड़ा मंदिर, वार्ड नंबर 9 का विशेष सहयोग रहा। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन किया गया।
आयोजक साध्वी सिद्धी अंशू गुप्ता ने कहा कि संत शरीर तक सीमित नहीं होते, बल्कि शाश्वत चेतना के स्वरूप होते हैं। गुरु का स्मरण जहां होता है, वहीं उनके सानिध्य की अनुभूति होती है और उनकी कृपा जीवन में सच्चे प्रकाश का मार्ग प्रशस्त करती है।


उन्होंने कहा कि माँ गंगा के पावन तट से गुरुमाँ का आत्मिक संबंध रहा है। हरिद्वार और ऋषिकेश की धरती उनकी साधना और दिव्य स्मृतियों की साक्षी रही है। इसी भाव के साथ संत प्राकट्य दिवस का आयोजन गुरुमाँ के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अर्पित करने का माध्यम बना।


समारोह का संदेश “जो पारस सोना करे, वो पारस है कच्चा। जो पारस-पारस करे, वो पारस है सच्चा।” श्रद्धालुओं के बीच गुरु-भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का भाव जगाता रहा। भंडारे के साथ संत प्राकट्य दिवस का विधिवत समापन हुआ और श्रद्धालु गुरुमाँ की स्मृतियों तथा आशीर्वाद को अपने हृदय में संजोकर लौटे।

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