हरिद्वार(कमल शर्मा)23 अगस्त। प्रेमनगर आश्रम में आयोजित चार दिवसीय हिमालयन एमएसएमई एक्सपो के तीसरे दिन जैविक खेती, औषधीय वनस्पतियों और उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। वाइब्रेंट उत्तराखंड के अंतर्गत भारतीय मीडिया एवं इवेंट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित एक्सपो में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने जैविक खेती पर आयोजित सेमिनार को संबोधित किया।

सतपाल महाराज ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादकों, किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ा मंच साबित हो रही हैं। यहां उत्तराखंड में निर्मित उत्पादों को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है और देशभर से आने वाले व्यापारी प्रदेश में तैयार हो रहे नए उत्पादों से परिचित हो रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादों के बाजार और बिक्री को विस्तार मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान सदियों से जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक संपदा से जुड़ी रही है। यारसागुम्बा (कीड़ा जड़ी), सी-बकथॉर्न (ले-बेरी), जटामांसी और सालम पंजा जैसी औषधीय वनस्पतियों में अपार संभावनाएं हैं। कोरोना काल के बाद लोगों का रुझान प्राकृतिक उत्पादों और आयुर्वेद की ओर तेजी से बढ़ा है। ऐसे में उत्तराखंड के औषधीय एवं जैविक उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

महाराज ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से आगाह करते हुए विशुद्ध जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और अत्यधिक रसायनों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। सिक्किम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां जैविक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाया गया है और उत्तराखंड में भी जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने को लेकर लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल खेती का तरीका नहीं, बल्कि स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है। यदि किसानों को जैविक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो मिट्टी की उर्वरता, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी पैदा होंगे।
सतपाल महाराज ने एक्सपो में लगे विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय घी, शहद, अचार, जड़ी-बूटियों सहित विभिन्न उत्पादों की जानकारी ली और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से लोगों को स्थानीय उत्पादों की जानकारी मिलने के साथ-साथ उत्पादकों को सीधे बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है।
वहीं उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से खेतों की उर्वरता और मिट्टी का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने पॉलिथीन से पर्यावरण और कृषि को होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई।
उन्होंने जैविक खेती में कंपोस्ट खाद तथा गोबर की खाद के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गो-आधारित जैविक खाद खेतों की उर्वरता बढ़ाने में उपयोगी है। जब किसान प्राकृतिक और जैविक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करेंगे तो खेती की लागत कम करने, भूमि की गुणवत्ता सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
हिमालयन एमएसएमई एक्सपो में उत्तराखंड की पारंपरिक कला, स्थानीय उत्पाद, खाद्य पदार्थ, जैविक सामग्री और औषधीय उत्पादों को मंच मिलने से यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। ऐसे आयोजन किसानों, कारीगरों, लघु उद्यमियों और खरीदारों के बीच सेतु का काम करते हैं।
आयोजकों ने बताया कि चार दिवसीय एक्सपो का समापन सोमवार को होगा। अंतिम दिन भी विभिन्न कार्यक्रमों के साथ स्थानीय उद्यमियों और उत्पादकों को प्रोत्साहित किया जाएगा।













