महंत गणेश दास ने अध्यक्ष और महामंत्री, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को भेजा विस्तृत ज्ञापन, संपत्तियों की जांच और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की अपील
हरिद्वार(कमल शर्मा)श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन (पंजीकृत) के महासचिव महंत गणेश दास ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवीन्द्र पुरी महाराज एवं महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी महाराज को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर अखाड़े के साथ कथित रूप से हो रहे अन्याय, निष्कासन की कार्रवाई और संपत्तियों से जुड़े विवादों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने विरुद्ध की गई कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए उसे तत्काल निरस्त करने तथा अखाड़े में निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है।
ज्ञापन में महंत गणेश दास ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 के उज्जैन कुंभ से उनके तथा अखाड़े के आराध्य देवताओं के साथ लगातार अन्याय और अपमान किया जा रहा है। उनका कहना है कि बिना नोटिस और बिना पक्ष सुने उन्हें अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

उन्होंने कुछ संतों पर अखाड़े की संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने और उन्हें बेचने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस संबंध में संबंधित दस्तावेज भी ज्ञापन के साथ संलग्न किए गए हैं। उन्होंने अखाड़ा परिषद से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
महंत गणेश दास ने कहा कि श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन गुरु नानक देव जी महाराज के बड़े साहिबजादे जगतगुरु श्रीचंद्र भगवान की परंपरा से जुड़ा है और पंजाब की संगत तथा संत समाज उनके निष्कासन और देवताओं को कुंभ स्नान से वंचित किए जाने को लेकर आक्रोशित है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि अखाड़े की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुनः स्थापित करने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अपने संरक्षण में चुनाव अधिकारी नियुक्त कर निष्पक्ष चुनाव कराए, जिससे अखाड़े के पदाधिकारियों का विधिवत निर्वाचन हो सके और विवाद का स्थायी समाधान निकल सके।
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी हरिद्वार, जिलाधिकारी प्रयागराज, जिला कलेक्टर उज्जैन तथा जिला कलेक्टर नासिक को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।









