हरिद्वार/मेरठ। मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित लाठीचार्ज कार्रवाई का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।
आयोग ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण और गृह सचिव संजय प्रसाद को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ पुलिस अधिकारी पहले से हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। आयोग ने प्रथम दृष्टया इसे मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन का मामला मानते हुए संज्ञान लिया है। शिकायतकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, घायलों को समुचित उपचार तथा उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
इस मामले पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता, विश्व दलित परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एवं भारतीय किसान यूनियन वेलफेयर फाउंडेशन के राष्ट्रीय सलाहकार श्री प्रियव्रत ने कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान निर्दोष लोगों पर अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मानवाधिकारों की रक्षा करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
भीम आर्मी बहुजन एकता मिशन सामाजिक संगठन के चीफ लोकेश कटारिया ने कहा, “मनुवादी मानसिकता को संविधान की लाठी से तोड़ा जा सकता है।”
अब सभी की निगाहें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की की जाएगी l
मेरठ लाठीचार्ज प्रकरण पर एनएचआरसी सख्त, यूपी सरकार को नोटिस; प्रियव्रत बोले— लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठी नहीं, न्याय मिलना चाहिए





