हरिद्वार। स्वामी सर्वानंद घाट पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए गोवर्धन पूजा लीला, महारास प्रसंग तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह जैसे अलौकिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया।
कथा के दौरान गोवर्धन पूजा प्रसंग में बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान का नाश कर प्रकृति और गौ-संवर्धन का संदेश दिया। महारास प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि यह जीव और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है, जिसमें प्रेम, समर्पण और भक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति दिखाई देती है।
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने बताया कि सच्चे प्रेम, अटूट विश्वास और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव 8 से 15 जून 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक आयोजित किया जा रहा है, जबकि प्रतिदिन सायं 7 बजे से संकीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा अमृत का रसपान कर रहे हैं।
कथा स्थल: स्वामी सर्वानंद घाट, हरिद्वार
आयोजक: शिवांग एवं पाहुजा परिवार।
गोवर्धन धारण से महारास तक गूंजा कृष्ण प्रेम, रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने भक्तों को किया भाव-विभोर










