अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्रपुरी ने किया अभियान का समर्थन कहा धर्मनगरी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना बेहद आवश्यक
धर्मनगरी हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ और ‘वेज पुलाव’ को लेकर शुरू हुआ अभियान अब व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। अखंड परशुराम अखाड़े द्वारा शुरू की गई इस मुहिम को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रविंद्रपुरी का भी समर्थन मिल गया है। उन्होंने लोगों से शाकाहारी व्यंजनों के लिए ‘वेज बिरयानी’ की बजाय ‘वेज पुलाव’ शब्द का प्रयोग करने की अपील की है।
कुम्भ और कांवड़ यात्रा के मद्देनजर उठी मांग
मीडिया से बातचीत करते हुए श्री महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि हरिद्वार विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, जहां वर्ष 2027 में कुम्भ मेले का आयोजन होना है। इसके अलावा हर वर्ष आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा में भी लाखों-करोड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में धार्मिक नगरी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
‘बिरयानी’ शब्द को लेकर जताई आपत्ति
श्री महंत रविंद्रपुरी का कहना है कि ‘बिरयानी’ शब्द आमतौर पर मांसाहारी व्यंजन के रूप में जाना जाता है। ऐसे में जब शुद्ध शाकाहारी भोजन को ‘वेज बिरयानी’ कहा जाता है तो यह शब्द लोगों के मन में भ्रम पैदा करता है। उनका मानना है कि शाकाहारी व्यंजन के लिए ‘पुलाव’ शब्द अधिक उपयुक्त और भारतीय परंपराओं के अनुरूप है।
व्यापारियों पर दबाव बनाने का नहीं है उद्देश्य
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मकसद किसी व्यापारी, होटल संचालक या रेस्टोरेंट व्यवसायी पर दबाव बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सामाजिक और सांस्कृतिक आग्रह है। किसी के व्यापारिक हितों को प्रभावित करना या किसी पर अपनी बात थोपना इस अभियान का उद्देश्य नहीं है।
धार्मिक भावनाओं के प्रति जागरूकता का प्रयास
उन्होंने कहा कि साधु-संत समाज और अखंड परशुराम अखाड़ा केवल लोगों को धार्मिक भावनाओं और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करना चाहते हैं। उनका मानना है कि भाषा और शब्दावली का समाज की सांस्कृतिक पहचान पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए शब्दों के चयन में भी संवेदनशीलता आवश्यक है।
हरिद्वार से शुरू हुई मुहिम को मिल रहा समर्थन
पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार और कनखल क्षेत्र में अखंड परशुराम अखाड़े द्वारा इस अभियान को सक्रिय रूप से चलाया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को ‘वेज बिरयानी’ की जगह ‘वेज पुलाव’ शब्द अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस मुहिम को लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बचाने की पहल
अभियान से जुड़े संतों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण के लिए जनजागरण करना है। उनका मानना है कि हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थस्थल की गरिमा और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए समाज को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए।




