हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर का स्थापना दिवस श्रद्धा, भक्ति और संतों के दिव्य सानिध्य में अत्यंत भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए संत-महात्माओं, ट्रस्टियों और श्रद्धालु भक्तों ने सहभाग कर राष्ट्रभक्ति एवं सनातन संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि आदि गुरु आदि शंकराचार्य भगवान शंकर के अवतार थे तथा गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और मानवता की सेवा ही सच्ची साधना है।
उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1983 में भारत माता मंदिर की स्थापना राष्ट्रभक्ति और मानव सेवा के उद्देश्य से की थी। उनका जीवन गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सेवा को समर्पित रहा।

स्वामी ललितानंद गिरी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरी लाखों श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा कि भारत माता मंदिर, स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी की राष्ट्र के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। सभी को उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
मंदिर के सचिव आईडी शास्त्री ने सभी संत-महापुरुषों का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी विश्वात्मानंद गिरी सहित अनेक संत-महंत, ट्रस्टी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित



