नई दिल्ली, 11 मई, 2026 – भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने इन्वेस्ट यूपी के सहयोग से 27 अप्रैल, 2026 को होटल ले मेरिडियन, नई दिल्ली में “उत्तर प्रदेश के लिए नवीकरणीय ऊर्जा नीति को आगे बढ़ाने पर राष्ट्रीय नीति कार्यशाला” का सफल आयोजन किया। केवल आमंत्रण आधारित इस सम्मेलन का विषय “राष्ट्रीय मिशनों, अग्रणी राज्यीय ढाँचों और उभरती नेट ज़ीरो अर्थव्यवस्था का मानकीकरण” था, जिसमें शीर्ष नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और अकादमिक शोधकर्ताओं ने भारत के सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा तय करने हेतु विचार-विमर्श किया।
उद्घाटन संबोधन के दौरान कार्यशाला संयोजक डॉ. कोमल त्रिपाठी ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए इस बात पर बल दिया कि कार्यशाला का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश के ऊर्जा संक्रमण के लिए एक व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप विकसित करना है। उन्होंने कहा कि नेट ज़ीरो प्राप्त करना एक बहुआयामी चुनौती है और इसलिए इसके लिए एकीकृत दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने प्रतिक्रिया-केंद्रित सोच से प्रणाली-केंद्रित सोच की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप रासायनिक और ऊर्जा क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली गैर-जीवाश्म प्रौद्योगिकियों के माध्यम से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता से मुक्त करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य भाषण देते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी ने भारत के तीव्र ऊर्जा संक्रमण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाल ही में नवीकरणीय ऊर्जा ने भारत की अधिकतम विद्युत मांग का 32 प्रतिशत से अधिक पूरा किया है तथा देश में 274 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है। आगे की दिशा पर बल देते हुए उन्होंने 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य की दिशा में देश की प्रगति का उल्लेख किया तथा निरंतर आर्थिक विकास प्राप्त करने के लिए “तीन आई” रणनीति — निवेश, प्रौद्योगिकी आयात और नवाचार एवं अनुसंधान — अपनाने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पॉलीसिलिकॉन उत्पादन जैसी ऊर्जा-गहन विनिर्माण प्रक्रियाओं को समर्थन देने की क्षमता है, जिससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत किया जा सकता है।
नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी. के. सारस्वत ने रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी स्वच्छ ऊर्जा यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि मजबूत नीतिगत इच्छाशक्ति के साथ राज्य एक पिछड़े अपनाने वाले राज्य से बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा नेतृत्वकर्ता के रूप में विकसित हो सकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने राज्य की सौर, बायोऊर्जा और हरित हाइड्रोजन नीतियों को एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा रणनीति में सम्मिलित करने तथा राज्य ऊर्जा संक्रमण कोष स्थापित करने की सिफारिश की। इसके अतिरिक्त डॉ. सारस्वत ने दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हरित ऊर्जा गलियारों के विस्तार और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की स्थापना सहित ग्रिड आधुनिकीकरण की अत्यंत आवश्यकता पर बल दिया।
इसके पश्चात यूपीनेडा के सचिव एवं मुख्य परियोजना अधिकारी श्री पंकज सिंह ने उत्तर प्रदेश की नीतिगत रूपरेखा का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें सौर ऊर्जा, बायोऊर्जा और हरित हाइड्रोजन पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने राज्य के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों पर प्रकाश डाला, जिनमें सौर ऊर्जा नीति 2022 के अंतर्गत 22,000 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य तथा हरित हाइड्रोजन नीति 2024 के अंतर्गत प्रतिवर्ष 10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का उद्देश्य शामिल है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने अपने स्वागत संबोधन में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में ऊर्जा परिदृश्य पर जीवाश्म ईंधनों का प्रभुत्व है, इसलिए कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों और परिपत्र अर्थव्यवस्था सिद्धांतों के माध्यम से इनके उपयोग को अधिक स्वच्छ बनाना आवश्यक है। प्रो. पंत ने भारत में ऊर्जा उत्पादन हेतु उपलब्ध लगभग 452 मिलियन टन बायोमास की विशाल क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि नवीकरणीय प्रौद्योगिकियों का मूल्यांकन जीवन-चक्र आकलन के आधार पर किया जाना चाहिए तथा सामग्री विज्ञान में प्रगति इन प्रणालियों की दक्षता और लागत-प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इन्वेस्ट यूपी की अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती प्रेरणा शर्मा ने इस बात पर बल दिया कि उत्तर प्रदेश की जनसांख्यिकीय क्षमता उसे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी राज्य बना सकती है। वहीं इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्रीमती वर्तिका शुक्ला ने उद्घाटन पूर्ण सत्र के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ऊर्जा संक्रमण नीतियों पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रमुख विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। हाइड्रोजन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. आर. के. मल्होत्रा ने राष्ट्रीय 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन लक्ष्य को समर्थन देने के लिए लागत-प्रभावी भंडारण प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया तथा संपीड़ित बायोगैस में व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया।
पूरे दिन आयोजित व्यापक पूर्ण सत्रों में ऊर्जा संक्रमण हेतु केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के एकीकरण पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त सौर ऊर्जा प्रगति, हरित हाइड्रोजन का भविष्य, बायोऊर्जा नवाचार तथा नेट ज़ीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने की चुनौतियों पर केंद्रित संवाद आयोजित किए गए। चर्चाओं में परिवर्ती नवीकरणीय ऊर्जा को स्थिर बनाए रखने के लिए उन्नत बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की आवश्यकता, सतत विमानन ईंधन के विकास तथा बड़े परियोजनाओं के लिए एकल खिड़की स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल बनाने के महत्व पर भी बल दिया गया।
उद्घाटन सत्र का समापन उपनिदेशक प्रो. यू. पी. सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यशाला की रूपरेखा का कुशलतापूर्वक संचालन आयोजन सचिव श्री अखंड प्रताप सिंह द्वारा किया गया।
कार्यशाला के सहयोगी साझेदारों में एनटीपीसी, गेल, होरिबा, वी-मार्क, जूलक्रांति, हाइड्रोजन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, कार्बन यू-टर्न, एनसिस और आईटेन शामिल थे।



