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हरिद्वार, 20 अप्रैल 2026।
भूपतवाला स्थित ओम मुरारी आश्रम, रानी गली में आज आश्रमधारी महामंडलेश्वरों, महंतों और संतों की एक विशाल एवं महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता पूज्य बाबा हठयोगी जी महाराज ने की, जिसमें देशभर से आए सैकड़ों संतों ने भाग लिया।

बैठक में संतों एवं आश्रमों की सुरक्षा, बढ़ती घटनाओं और प्रशासनिक उपेक्षा जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। संतों ने एक स्वर में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार हो रहे हमलों और समस्याओं के समाधान हेतु एक सशक्त संगठन की आवश्यकता अत्यंत जरूरी हो गई है।
इसी क्रम में सर्वसम्मति से ‘अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद’ के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह परिषद 127 संप्रदायों को जोड़ते हुए देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर के संतों और आश्रमों को एक मंच पर लाने का कार्य करेगी।

सभा में सभी संतों ने एकमत होकर महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी महाराज को परिषद का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया। संतों के आग्रह को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा,
“संतों की सेवा ही भगवान की सेवा है। यह दायित्व मेरे लिए सौभाग्य है, जिसे मैं पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ निभाऊंगा।”

इसके साथ ही उन्होंने परिषद की सूक्ष्म राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए भविष्य में एक विशाल राष्ट्रीय परिषद गठित करने का आश्वासन दिया।
🔹 घोषित पदाधिकारी इस प्रकार हैं:
संरक्षक: बाबा हठयोगी जी महाराज, स्वामी गोपाल गिरि जी महाराज
उपाध्यक्ष: विनोद जी महाराज
महामंत्री: स्वामी राम विशाल दास जी महाराज
सह-महामंत्री: स्वामी सत्यव्रत आनंद सरस्वती जी महाराज
मंत्री: स्वामी ओम्मानंद जी महाराज

कोषाध्यक्ष: स्वामी स्वयमानंद जी महाराज (अजरानंद आश्रम)
संतों ने स्पष्ट किया कि संगठन का विस्तार शीघ्र ही पूरे देश में किया जाएगा, ताकि आश्रम, मठ और मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके तथा संत समाज की आवाज को सशक्त मंच मिल सके।
इस अवसर पर अनेक प्रमुख संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से स्वामी प्रबोधानंद गिरि जी महाराज, बाबा बलराम दास हठयोगी जी महाराज, स्वामी गोपाल गिरि जी महाराज, स्वामी सत्यार्थ आनंद सरस्वती जी महाराज, स्वामी राम विशाल दास जी महाराज, स्वामी शिवानंद जी महाराज स्वामी चंद्रभूषण आनंद सरस्वती जी महाराज स्वामी विनोद महाराज स्वामी देवानंद जी महाराज स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज स्वामी श्याम प्रकाश जी महाराज स्वामी मुकेश आनंद जी महाराज स्वामी ओम आनंदी महाराज स्वामी ओम दास जी महाराज स्वामी प्रद्युम्न दास जी महाराज स्वामी प्रद्युम्नब्रह्मचारी स्वामी वीरेंद्र गिरी जी महाराज स्वामी प्रज्ञानंद गिरी जी महाराज स्वामी महानंद सरस्वती जी महाराज आचार्य परम चैतन्य जी महाराज स्वामी अनुज दास जी महाराज महंत राधा गिरी अवध गिरी प्रहलाद दास जी महाराज कैलाशानंद गिरि जी महाराज स्वामी महेश्वरानंद जी महाराज कोतवाल कमल मुनि जी महाराज आचार्य शशिकांत जी महाराज साध्वी निशा ज्योति निर्मल साधना धाम स्वामी अमिता भारती वेद निकेतन स्वामी तृप्ता सरस्वती पावनधाम स्वामी विमल चेतन जी महाराज आदि प्रमुख संतों की उपस्थिति रही।
यह बैठक संत समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है, जहां सुरक्षा, संगठन और सम्मान के लिए एकजुट होकर संतों ने एक नई दिशा तय की है।



