पारिजात साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी’ये खुशियों की घड़ियाँ मुबारक तुम्हें, ये फूलों की लड़ियाँ मुबारक तुम्हें’

दिनांक- 11 अप्रैल, 2026
पारिजात साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी
‘ये खुशियों की घड़ियाँ मुबारक तुम्हें, ये फूलों की लड़ियाँ मुबारक तुम्हें’
हरिद्वार। पारिजात साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष तथा लोकप्रिय गीतकार सुभाष मलिक के टी-क्लस्टर, शिवालिक नगर स्थित निवास पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन कर के नगर के अनेक कवियों ने उन्हें वैवाहिक वर्षगांठ की बधाईयाँ व शुभकामनाएँ दी।‌ गोष्ठी में कवि साधुराम ‘पल्ल्व’ की भावनाएँ थीं- ‘ये खुशियों की घड़ियाँ मुबारक तुम्हें, ये फूलों की लड़ियाँ मुबारक तुम्हें’ के साथ व्यक्त की।
‌‌     चेतना पथ संपादक व गीतकार अरुण कुमार पाठक की शिकायत थी ‘कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है, रोज़ मिलते हैं, मगर बात नहीं होती है’, इमरान बदायूंनी ने पूछा- ‘कौन था तेरे बाद, कि‌ जिसने कोशिश की समझने की।’‌‌ वरिष्ठ पत्रकार व कवि बृजेन्द्र हर्ष ने स्पष्ट किया- ‘कितने सपने होते अपने कितने प्रहार निसार रहे हैं, नयन वही अर्पण है जो बस अपनी और निहार रहे हैं।’
      युवा जोश की कवियित्री वृंदा वाणी ने ‘मानव को जो राह दिखाए, गीता वह दिव्य विधान है’ तथा डाॅ० सुशील कुमार त्यागी ‘अमित’ ने मानव जन्म मिला हमको ये ईश्वर का उपकार है’ प्रस्तुत कर अध्यात्म की दिव्य लौ जगाई, तो डॉ० अशोक गिरी की तकरीर थी ‘बेवजह किसी को ना सताया जाए, दबे हुए को और ना दबाया जाए।’ आक्सीजन‌ गैस की विशेषताएँ कुंवर पाल सिंह ‘धवल’ ने- ‘है ताक़त आग कि मुझसे मेरे बिन जल नहीं सकती’ कह कर समझाईं।‌ मेजबान वरिष्ठ कवि सुभाष मलिक ने ‘पनघट ऊपर नहीं दीखती अब पीपल की छाँव, जहाँ महकती थी मंजरियाँ कहाँ गए वो गाँव’ कह कर ग्रामीण परिवेश का चित्र खींचा।
‌‌‌‌       माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन तथा वरिष्ठ कवि कुंवर पाल सिंह ‘धवल’ की वाणी वंदना से शुरु हुई इस गोष्ठी की अध्यक्षता बृजेन्द्र हर्ष ने की, जबकि कुशल संचालन दीपशिखा के सचिव डाॅ० सुशील कुमार त्यागी ‘अमित’ ने किया।

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