भक्ति के रंग में सराबोर हुआ गोविन्द घाट, श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रीकृष्ण लीला एवं श्री राम लीला का भावपूर्ण वर्णन

हरिद्वार।/कमल शर्मा
पवित्र नगरी हरिद्वार के श्री गोविन्द घाट पर 8 से 14 मार्च 2026 तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के तीसरे दिन कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा प्रारंभ होते ही पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण एवं श्री राम की महिमा का श्रवण कर भक्ति में लीन हो गए। इसके अलावा मुख्य रूप से भगवान के 24 अवतारों, समुद्र मंथन, और विष्णु-लक्ष्मी की कथा का वर्णन भी हुआ। इसमें भक्ति, समुद्र मंथन से अमृत प्राप्ति, और भगवान के विभिन्न रूपों का महत्व बताया गया l
कथाव्यास श्री भक्तिवेदांत सिद्धान्ती महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान की दिव्य लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी करुणा, भक्तों के प्रति प्रेम और धर्म की स्थापना के संदेश को सुनाया गया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत हमें सिखाती है कि मनुष्य को अपने जीवन में सदाचार, सेवा, करुणा और भक्ति को अपनाना चाहिए। भगवान की कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि जीवन में प्रभु भक्ति और सत्कर्म को स्थान दें, यही जीवन की सच्ची सफलता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भजन-कीर्तन में झूमते नजर आए। पूरा गोविन्द घाट क्षेत्र “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।

भगवान विष्णु के अवतार, अयोध्या के राजा राम की यह पावन गाथा, सत्य, धर्म और मर्यादा का प्रतीक है।रघुकुल शिरोमणि, दशरथ पुत्र राम, सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास गए, जहाँ रावण द्वारा सीता का हरण किया गया।हनुमान और वानर सेना के सहयोग से, राम ने लंका में रावण का वध कर, अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त कीविकिपीडिया

श्री राम कथा: अति संक्षिप्त

  • जन्म: त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर।
  • विवाह: जनकपुरी में माता सीता के साथ।
  • वनवास: कैकेयी के वचनों के कारण राम ने पिता की आज्ञा से 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया।
  • हरण और खोज: वन में रावण ने सीता का हरण किया। राम-लक्ष्मण ने हनुमान और वानर सेना के साथ खोज शुरू की।
  • विजय: सेतु निर्माण कर लंका पहुँचे, भीषण युद्ध में रावण का वध किया।
  • प्रत्यागमन: राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे और राम का राज्याभिषेक हुआ, जो रामराज्य के रूप में जाना जाता है। विकिपीडियाविकिपीडिया +4

यह कथा हमें जीवन में विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। vaidikyatra.orgvaidikyatra.org

यदि आप रामचरितमानस के किसी विशेष काण्ड (जैसे बालकाण्डसुन्दरकाण्ड) या किसी विशेष घटना के बारे में जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएँ।

राम – विकिपीडिया

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श्रीरामकथा हमें क्या सिखाती है? श्रीराम कथा की सबसे बड़ी सीख है कि किस प्रकार संघशक्ति द्वारा बुराई पर अच्छाई की, अधर्म पर धर्म की जीत संभव है । श्रीराम कथा हमे…

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भगवान श्रीराम जी का जन्म अयोध्या के राजा के


प्राइड एलीट के आयोजकों ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना है। उन्होंने कहा कि कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और सभी के सहयोग से कार्यक्रम भव्य रूप से संपन्न हो रहा है।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करें और धर्म लाभ प्राप्त करें।
इस अवसर पर प्राइड एलीट के समस्त आयोजकगण, संत-महात्मा एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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