हरिद्वार। संयास रोड स्थित श्री रामेश्वरानन्द आश्रम के पीठाधीश्वर प्रातः स्मरणीय परम वंदनीय महामंडलेश्वर 1008 परम पूज्य स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज ऑस्ट्रेलिया में आश्रम की स्थापना करने के बाद आज विश्व भ्रमण से जब पावन नगरी हरिद्वार लौटे तो सनातन प्रेमी देश प्रेम की भावना से उत्साहित होकर झूम उठे सनातन की धर्म ध्वजा लेकर जब परम वंदनीय स्वामी रामेश्वरानंद जी महाराज कनखल में आश्रम में पहुंचे तो सनातन प्रेमियों ने गर्मजोशी के साथ फूलों की सुगंधित महक तथा वर्ष के बीच सनातन के नारों के उद्घोष के बीच स्वामी जी का क्रांतिकारी सम्मान किया l

इस अवसर पर बोलते हुए अनंत विभूषित महामंडलेश्वर 1008 स्वामी रामेश्वरानन्द महाराज ने कहा आज संपूर्ण विश्व भारत की प्राचीन परंपरा सनातन परंपरा को अपने के लिए आतुर है सनातन परंपरा विश्व की सबसे बड़ी आदर्शवादी परंपरा है जो भगवान राम द्वारा भी अनुश्रित की गई उन्होंने मात पिता तथा गुरुकी आज्ञा के लिए राजपाठ का मोह त्याग कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया यह परंपरा ईश्वर की आस्था के साथ-साथ बड़ों का आधार और सम्मान करना भी सिखाती हैआज का युग परिवर्तन का युग है।

पूरे विश्व में एक नई चेतना का संचार हो रहा है, और यह चेतना है सनातन धर्म की क्रांति। युगों-युगों से चली आ रही सनातन परंपरा आज फिर से मानवता का मार्गदर्शन कर रही है। इस महान परिवर्तन के पीछे संत-महापुरुषों का पावन मार्गदर्शनसबसे बड़ा आधार है। सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। इसमें सत्य, अहिंसा, करुणा, प्रेम, सेवा और सह-अस्तित्व का संदेश निहित है। आज जब विश्व अशांति और भौतिकता की दौड़ में भटक नातन के ये मूल्य मानव को सही दिशा दिखारहे हैं।

देश-विदेश में संत-महापुरुष अपने वचनों,तपस्या और साधना से लोगों को आत्मबोध की ओर ले जा रहे हैं। वे बता रहे हैं कि सच्चा सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मा की शांति में है। योग, ध्यान, वेद, उपनिषद और गीता के उपदेश आज विश्व भर में अपनाए जा रहे हैं, जो सनातन की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण हैं। अवसर पर बोलते हैं वरिष्ठ समाजसेवी मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट श्री जगदीश लाल पहावा ने कहायह सनातन की क्रांति किसी युद्ध या संघर्ष की नहीं, बल्कि चेतना की क्रांति है। यह क्रांति मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है, प्रकृति से जोड़ती है और परम सत्य से जोड़ती है। इसी कारण आज हर वर्ग, हर देश और हर संस्कृति के लोग सनातन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अंततः कहा जा सकता है कि संत-महापुरुषों का यह पावन मार्गदर्शन सम्पूर्ण विश्व को सनातन की ओर ले जा रहा है। यह मार्गशांति का है, कल्याण का है औरसम्पूर्ण मानवता के उज्ज्वलभविष्यका मार्ग है। सनातन ही सत्य है, सनातन ही शाश्वत है कार्यक्रम का संचालन श्री ओपी सिंह ने किया भारी संख्या में स्थानीय समाजसेवी तथा आम जनमानस मौजूद थे।
